Correct Answer:
Option B - जौ और चना, मौसम परिवर्तन के आधार पर तीन मुख्य फसल मौसम-रबी, खरीफ तथा जायद की होती हैं।
रबी की फसलें – यह सामान्यत: अक्टूबर-नवम्बर माह में बोई जाती है। इन फसलों की बुआई के समय कम तापमान तथा पकते समय गर्म वातावरण की आवश्यकता होती है।
उदाहरण– गेहूँ , जौ, आलू, चना, मसूर, अलसी, मटर, सरसों आदि।
खरीफ की फसलें – ये फसलें मानसून की शुरूआत के साथ बोई जाती हैं।
उदाहरण - धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, मूंग, उड़द, कपास, जूट, मूंगफली आदि
जायद की फसलें – ये फसलें मुख्यत: मार्च-अपै्रल में बोई जाती है। ये फसलें तेज गर्मी तथा शुष्क हवाएँ सहन करने में सक्षम होती है।
उदाहरण – तरबूज, खीरा, खरबूजा, ककड़ी, सूरजमुखी आदि।
B. जौ और चना, मौसम परिवर्तन के आधार पर तीन मुख्य फसल मौसम-रबी, खरीफ तथा जायद की होती हैं।
रबी की फसलें – यह सामान्यत: अक्टूबर-नवम्बर माह में बोई जाती है। इन फसलों की बुआई के समय कम तापमान तथा पकते समय गर्म वातावरण की आवश्यकता होती है।
उदाहरण– गेहूँ , जौ, आलू, चना, मसूर, अलसी, मटर, सरसों आदि।
खरीफ की फसलें – ये फसलें मानसून की शुरूआत के साथ बोई जाती हैं।
उदाहरण - धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, मूंग, उड़द, कपास, जूट, मूंगफली आदि
जायद की फसलें – ये फसलें मुख्यत: मार्च-अपै्रल में बोई जाती है। ये फसलें तेज गर्मी तथा शुष्क हवाएँ सहन करने में सक्षम होती है।
उदाहरण – तरबूज, खीरा, खरबूजा, ककड़ी, सूरजमुखी आदि।