Correct Answer:
Option D - अधोलिखिता सूक्ति: किरातार्जुनीये विद्यते
‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:।’
हितकर और मन को प्रिय लगने वाली वाणी दुर्लभ है। यह कथन वनेचर युधिष्ठिर से कहता है।
ग्रन्थ रचनाकार
शुकनासोपदेश – बाण भट्ट
उत्तररामचरितम् – भवभूति
किरातार्जुनीयम् – भारवि
D. अधोलिखिता सूक्ति: किरातार्जुनीये विद्यते
‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:।’
हितकर और मन को प्रिय लगने वाली वाणी दुर्लभ है। यह कथन वनेचर युधिष्ठिर से कहता है।
ग्रन्थ रचनाकार
शुकनासोपदेश – बाण भट्ट
उत्तररामचरितम् – भवभूति
किरातार्जुनीयम् – भारवि