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Q: अधोलिखिता सूक्ति: कुत्र विद्यते? ‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:।’
  • A. मेघदूते
  • B. शुकनासोपदेशे
  • C. उत्तररामचरिते
  • D. किरातार्जुनीये
Correct Answer: Option D - अधोलिखिता सूक्ति: किरातार्जुनीये विद्यते ‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:।’ हितकर और मन को प्रिय लगने वाली वाणी दुर्लभ है। यह कथन वनेचर युधिष्ठिर से कहता है। ग्रन्थ रचनाकार शुकनासोपदेश – बाण भट्ट उत्तररामचरितम् – भवभूति किरातार्जुनीयम् – भारवि
D. अधोलिखिता सूक्ति: किरातार्जुनीये विद्यते ‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:।’ हितकर और मन को प्रिय लगने वाली वाणी दुर्लभ है। यह कथन वनेचर युधिष्ठिर से कहता है। ग्रन्थ रचनाकार शुकनासोपदेश – बाण भट्ट उत्तररामचरितम् – भवभूति किरातार्जुनीयम् – भारवि

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अधोलिखिता सूक्ति: किरातार्जुनीये विद्यते ‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:।’ हितकर और मन को प्रिय लगने वाली वाणी दुर्लभ है। यह कथन वनेचर युधिष्ठिर से कहता है। ग्रन्थ रचनाकार शुकनासोपदेश – बाण भट्ट उत्तररामचरितम् – भवभूति किरातार्जुनीयम् – भारवि