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Q: ‘बंगवाल मेला’ किस स्थान पर लगता है?
  • A. लोहा घाट
  • B. बागेश्वर
  • C. चम्पावत
  • D. देवीधुरा
Correct Answer: Option D - उत्तरांचल के चम्पावत जिले से 45 किमी की दूरी पर देवीधुरा में स्थित 12वीं सदी में निर्मित वाराही देवी का मन्दिर है। इस मन्दिर में प्रत्येक वर्ष रक्षा बन्धन के अवसर पर श्रावणी पूर्णिमा को विशाल मेले, जिसे बगवाल मेला तथा स्थानीय भाषा में असाड़ी कौतीक भी कहा जाता है, का आयोजन किया जाता है।
D. उत्तरांचल के चम्पावत जिले से 45 किमी की दूरी पर देवीधुरा में स्थित 12वीं सदी में निर्मित वाराही देवी का मन्दिर है। इस मन्दिर में प्रत्येक वर्ष रक्षा बन्धन के अवसर पर श्रावणी पूर्णिमा को विशाल मेले, जिसे बगवाल मेला तथा स्थानीय भाषा में असाड़ी कौतीक भी कहा जाता है, का आयोजन किया जाता है।

Explanations:

उत्तरांचल के चम्पावत जिले से 45 किमी की दूरी पर देवीधुरा में स्थित 12वीं सदी में निर्मित वाराही देवी का मन्दिर है। इस मन्दिर में प्रत्येक वर्ष रक्षा बन्धन के अवसर पर श्रावणी पूर्णिमा को विशाल मेले, जिसे बगवाल मेला तथा स्थानीय भाषा में असाड़ी कौतीक भी कहा जाता है, का आयोजन किया जाता है।