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Q: यास्यत्यद्य शकुन्तलेति हृदयं सम्पृष्टमुत्कण्ठया लक्षणं किम्?
  • A. स्रग्धरा
  • B. शार्दूलविक्रीडितम्
  • C. शिख्रिणी
  • D. उपर्युक्तेषु एकस्मादधिक:
  • E. उपर्युक्तेषु किञ्चन् अपि नास्ति
Correct Answer: Option B - यास्यत्यद्य शकुन्तलेति हृदयं सम्पृष्टमुत्कण्ठया। श्लोके शार्दूलविक्रीडितम् छन्द: अस्ति। इस श्लोक में शार्दूलविक्रीडित छन्द है। ‘सूर्याश्वै:मसजा स्ततो सततगा शार्दूलविक्रीडितं’ जिसे छन्द केप्रत्येक चरण में क्रमश: मगण, सगण, जगण, सगण, तगण तथा एक गुरु वर्ण आये उसे शार्दूलविक्रीडित कहते है। ऽ ऽऽ। ।ऽ ।ऽ। ।।ऽ ऽ ऽ। ऽ ऽ। ऽ यास्यत्यद्य शकुन्तलेति हृदयं संस्पृष्ट मुत्कण्ठया।
B. यास्यत्यद्य शकुन्तलेति हृदयं सम्पृष्टमुत्कण्ठया। श्लोके शार्दूलविक्रीडितम् छन्द: अस्ति। इस श्लोक में शार्दूलविक्रीडित छन्द है। ‘सूर्याश्वै:मसजा स्ततो सततगा शार्दूलविक्रीडितं’ जिसे छन्द केप्रत्येक चरण में क्रमश: मगण, सगण, जगण, सगण, तगण तथा एक गुरु वर्ण आये उसे शार्दूलविक्रीडित कहते है। ऽ ऽऽ। ।ऽ ।ऽ। ।।ऽ ऽ ऽ। ऽ ऽ। ऽ यास्यत्यद्य शकुन्तलेति हृदयं संस्पृष्ट मुत्कण्ठया।

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यास्यत्यद्य शकुन्तलेति हृदयं सम्पृष्टमुत्कण्ठया। श्लोके शार्दूलविक्रीडितम् छन्द: अस्ति। इस श्लोक में शार्दूलविक्रीडित छन्द है। ‘सूर्याश्वै:मसजा स्ततो सततगा शार्दूलविक्रीडितं’ जिसे छन्द केप्रत्येक चरण में क्रमश: मगण, सगण, जगण, सगण, तगण तथा एक गुरु वर्ण आये उसे शार्दूलविक्रीडित कहते है। ऽ ऽऽ। ।ऽ ।ऽ। ।।ऽ ऽ ऽ। ऽ ऽ। ऽ यास्यत्यद्य शकुन्तलेति हृदयं संस्पृष्ट मुत्कण्ठया।