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Q: With respect to Income taxable under the head Salaries, which of the following statement/s is/ are correct? वेतन शीर्षक के तहत कर योग्य आय के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है? Statement-I: A payment can be constued as salary only if the payer is the employer and payee is the employee of the payer/कथन-I भुगतान को वेतन के रूप में तभी माना जा सकता है जब भुगतानकर्ता नियोक्ता है और भुगतान प्राप्तकर्ता भुगतानकर्ता का कर्मचारी है। Statement-2: If a person is acting as a agent for is principal, any commission or remuneration earned by the agent is taxable under the head "Salaryes"./कथन-II यदि कोई व्यक्ति अपने प्रधान के लिए एजेंट के रूप में कार्य कर रहा है, तो एजेंट द्वारा अर्जित कोई भी कमीशन या पारिश्रमिक ‘वेतन’ मद के तहत कर योग्य होगी।
  • A. Only statement-I is correct केवल कथन I सही है।
  • B. Both statement-I and statement-II are incorrect/कथन- I कथन-II दोनों कथन गलत है।
  • C. Only statement-II is correct केवल कथन II सही है।
  • D. Both statement-I and statement-II are correct कथन- I कथन-II दोनों कथन सत्य है।
Correct Answer: Option A - वेतन शीर्षक के तहत कर योग्य आय के सम्बन्ध में कथन-1- ‘‘भुगतान को वेतन के रूप में तभी माना जा सकता है जब भुगतानकर्ता नियोक्ता है भुगतान प्राप्तकर्ता भुगतानकर्ता का कर्मचारी है’’ सत्य है। नियोक्ता और कर्मचारी के बीच प्रत्यक्ष रूप से सम्बन्ध होना चाहिए। जबकि किसी प्रधान के एंजेट के रूप में कार्य करने के बदले एंजेट को प्राप्त होने वाला पारिश्रामिक या वेतन आय के अन्य स्त्रोत शीर्षक के तहत कर योग्य होता है।
A. वेतन शीर्षक के तहत कर योग्य आय के सम्बन्ध में कथन-1- ‘‘भुगतान को वेतन के रूप में तभी माना जा सकता है जब भुगतानकर्ता नियोक्ता है भुगतान प्राप्तकर्ता भुगतानकर्ता का कर्मचारी है’’ सत्य है। नियोक्ता और कर्मचारी के बीच प्रत्यक्ष रूप से सम्बन्ध होना चाहिए। जबकि किसी प्रधान के एंजेट के रूप में कार्य करने के बदले एंजेट को प्राप्त होने वाला पारिश्रामिक या वेतन आय के अन्य स्त्रोत शीर्षक के तहत कर योग्य होता है।

Explanations:

वेतन शीर्षक के तहत कर योग्य आय के सम्बन्ध में कथन-1- ‘‘भुगतान को वेतन के रूप में तभी माना जा सकता है जब भुगतानकर्ता नियोक्ता है भुगतान प्राप्तकर्ता भुगतानकर्ता का कर्मचारी है’’ सत्य है। नियोक्ता और कर्मचारी के बीच प्रत्यक्ष रूप से सम्बन्ध होना चाहिए। जबकि किसी प्रधान के एंजेट के रूप में कार्य करने के बदले एंजेट को प्राप्त होने वाला पारिश्रामिक या वेतन आय के अन्य स्त्रोत शीर्षक के तहत कर योग्य होता है।