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Q: With respect to Double Accounts System, which of the following statements are correct? दोहरे लेखा प्रणाली के संबंध में, निम्नलिखित मेें से कौन सा कथन सही हैं? (i) Discount and Premiums are permanently treated as capital items./छूट और प्रीमियम को स्थायी रूप से पूँजीगत मदों के रूप में माना जाता हैं (ii) Loan capital (debentures) Shares and Stocks are treated as capital items./ऋण पूंजी (ऋणपत्र) अंशों और स्टॉक को पूंजीगत मदों के रूप में माना जाता है। (iii) Interest on Loan and Debentures (i.e., all fixed interests) are to be charged against Revenue Account./ऋण और ऋणपत्र पर ब्याज (यानी सभी निश्चित ब्याज) राजस्व खाते के खिलाफ लगाया जाता है।
  • A. (i), (ii) and (iii) / (i), (ii) और (iii)
  • B. Only (i) and (ii) /केवल (i) और (ii)
  • C. Only (ii) and (iii) /केवल (ii) और (iii)
  • D. Only (i) and (iii) /केवल (i) और (iii)
Correct Answer: Option B - दोहरा लेखा प्रणाली रेलवे बिजली, गैस, जल आपूर्ति आदि जैसे सार्वजनिक उपयोगिता उपक्रमों के वार्षिक अंतिम खातों/वार्षिक वित्तीय विवरणों को प्रस्तुत करने की एक विधि है। इसकी विशेषताएँ निम्न है :- 1. लाभ और हानि खाते, लाभ और हानि विनियोग खातें के बजाय राजस्व खाता और शुद्ध राजस्व खाता तैयार किया जाता है। 2. पूँजी खातें में सम्पत्ति का कोई समायोजन नहीं किया जाता है। 3. छूट और प्रीमियम को स्थायी रूप से पूूंजीगत मदों के रूप में माना जाता है। 4. ऋण पूूंजी (ऋणपत्र), अंशों और स्टॉक को पूंजीगत मदों के रूप में माना जाता है।
B. दोहरा लेखा प्रणाली रेलवे बिजली, गैस, जल आपूर्ति आदि जैसे सार्वजनिक उपयोगिता उपक्रमों के वार्षिक अंतिम खातों/वार्षिक वित्तीय विवरणों को प्रस्तुत करने की एक विधि है। इसकी विशेषताएँ निम्न है :- 1. लाभ और हानि खाते, लाभ और हानि विनियोग खातें के बजाय राजस्व खाता और शुद्ध राजस्व खाता तैयार किया जाता है। 2. पूँजी खातें में सम्पत्ति का कोई समायोजन नहीं किया जाता है। 3. छूट और प्रीमियम को स्थायी रूप से पूूंजीगत मदों के रूप में माना जाता है। 4. ऋण पूूंजी (ऋणपत्र), अंशों और स्टॉक को पूंजीगत मदों के रूप में माना जाता है।

Explanations:

दोहरा लेखा प्रणाली रेलवे बिजली, गैस, जल आपूर्ति आदि जैसे सार्वजनिक उपयोगिता उपक्रमों के वार्षिक अंतिम खातों/वार्षिक वित्तीय विवरणों को प्रस्तुत करने की एक विधि है। इसकी विशेषताएँ निम्न है :- 1. लाभ और हानि खाते, लाभ और हानि विनियोग खातें के बजाय राजस्व खाता और शुद्ध राजस्व खाता तैयार किया जाता है। 2. पूँजी खातें में सम्पत्ति का कोई समायोजन नहीं किया जाता है। 3. छूट और प्रीमियम को स्थायी रूप से पूूंजीगत मदों के रूप में माना जाता है। 4. ऋण पूूंजी (ऋणपत्र), अंशों और स्टॉक को पूंजीगत मदों के रूप में माना जाता है।