search
Q: निम्नलिखित में से किसके अनुसार वाच्य बनता है?
  • A. कर्म
  • B. भाव
  • C. कर्ता
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option D - उपर्युक्त में से एक से अधिक से वाच्य बनता है। वाच्य:- क्रिया के उस परिवर्तन को वाच्य कहते है, जिसके द्वारा इस बात का बोध होता है कि वाक्य के अन्तर्गत कर्ता, कर्म अथवा भाव इनमें से किसकी प्रधानता है, इनमें किसके अनुसार क्रिया के पुरुष, वचन आदि आये हैं अर्थात् वाक्य में क्रिया के लिंग, वचन चाहे तो कर्ता के अनुसार होंगे अथवा कर्म के अनुसार अथवा भाव के अनुसार। वाच्य के भेद :- (1) कर्तृवाच्य :- क्रिया के उस रूपान्तर को कर्तृवाच्य कहते है, जिससे वाक्य में कर्ता की प्रधानता का बोध हो। जैसे- लड़का खाता है, मैने पुस्तक पढ़ी। (2) कर्मवाच्य :- क्रिया के उस रूपान्तर को कर्मवाच्य कहते है, जिससे वाक्य में कर्म की प्रधानता का बोध हो। जैसे-पुस्तक पढ़ी जाती है, आम खाया जाता है। (3) भाव वाच्य :- जिससे वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो। जैसे- मुझसे बैठा नही जाता, धूप में चला नही जाता।
D. उपर्युक्त में से एक से अधिक से वाच्य बनता है। वाच्य:- क्रिया के उस परिवर्तन को वाच्य कहते है, जिसके द्वारा इस बात का बोध होता है कि वाक्य के अन्तर्गत कर्ता, कर्म अथवा भाव इनमें से किसकी प्रधानता है, इनमें किसके अनुसार क्रिया के पुरुष, वचन आदि आये हैं अर्थात् वाक्य में क्रिया के लिंग, वचन चाहे तो कर्ता के अनुसार होंगे अथवा कर्म के अनुसार अथवा भाव के अनुसार। वाच्य के भेद :- (1) कर्तृवाच्य :- क्रिया के उस रूपान्तर को कर्तृवाच्य कहते है, जिससे वाक्य में कर्ता की प्रधानता का बोध हो। जैसे- लड़का खाता है, मैने पुस्तक पढ़ी। (2) कर्मवाच्य :- क्रिया के उस रूपान्तर को कर्मवाच्य कहते है, जिससे वाक्य में कर्म की प्रधानता का बोध हो। जैसे-पुस्तक पढ़ी जाती है, आम खाया जाता है। (3) भाव वाच्य :- जिससे वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो। जैसे- मुझसे बैठा नही जाता, धूप में चला नही जाता।

Explanations:

उपर्युक्त में से एक से अधिक से वाच्य बनता है। वाच्य:- क्रिया के उस परिवर्तन को वाच्य कहते है, जिसके द्वारा इस बात का बोध होता है कि वाक्य के अन्तर्गत कर्ता, कर्म अथवा भाव इनमें से किसकी प्रधानता है, इनमें किसके अनुसार क्रिया के पुरुष, वचन आदि आये हैं अर्थात् वाक्य में क्रिया के लिंग, वचन चाहे तो कर्ता के अनुसार होंगे अथवा कर्म के अनुसार अथवा भाव के अनुसार। वाच्य के भेद :- (1) कर्तृवाच्य :- क्रिया के उस रूपान्तर को कर्तृवाच्य कहते है, जिससे वाक्य में कर्ता की प्रधानता का बोध हो। जैसे- लड़का खाता है, मैने पुस्तक पढ़ी। (2) कर्मवाच्य :- क्रिया के उस रूपान्तर को कर्मवाच्य कहते है, जिससे वाक्य में कर्म की प्रधानता का बोध हो। जैसे-पुस्तक पढ़ी जाती है, आम खाया जाता है। (3) भाव वाच्य :- जिससे वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो। जैसे- मुझसे बैठा नही जाता, धूप में चला नही जाता।