Correct Answer:
Option D - कविता, कहानी, उपन्यास आदि को पढ़ने या सुनने से एवं नाटक को देखने से जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे ‘रस’ कहते हैं। रस काव्य की आत्मा हैं। भरतमुनि ने रसो की संख्या 8 बताई है; जिनमें 4 मूल रस (शृंगार, रौद्र, वीर, वीभत्स) तथा 4 गौण रस (हास्य, करुण, अद् भुत, भयानक)। इसमें करुण रस का मुख्य अर्थ शोक या दुख होता है। भरतमुनि शान्त रस से परिचित थे परन्तु उन्होंने शान्त रस को रस के रूप में स्वीकार नहीं किया था। अत: I तथा II केवल सही है।
D. कविता, कहानी, उपन्यास आदि को पढ़ने या सुनने से एवं नाटक को देखने से जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे ‘रस’ कहते हैं। रस काव्य की आत्मा हैं। भरतमुनि ने रसो की संख्या 8 बताई है; जिनमें 4 मूल रस (शृंगार, रौद्र, वीर, वीभत्स) तथा 4 गौण रस (हास्य, करुण, अद् भुत, भयानक)। इसमें करुण रस का मुख्य अर्थ शोक या दुख होता है। भरतमुनि शान्त रस से परिचित थे परन्तु उन्होंने शान्त रस को रस के रूप में स्वीकार नहीं किया था। अत: I तथा II केवल सही है।