search
Q: .
  • A. लाला मदनमोहन
  • B. लाला ब्रजकिशोर
  • C. मास्टर शिंभूदयाल
  • D. मुंशी चुन्नीलाल
Correct Answer: Option B - ‘‘और बहुत जल्दी हो तो बिल करके काम चला लीजिए, जब तक कागज के घोड़े दौड़ते हैं। रुपे की क्या कमी है?" परीक्षा गुरु उपन्यास के अंतर्गत यह कथन लाला ब्रजकिशोर का है। परीक्षा गुरू उपन्यास के रचनाकार श्रीनिवासदास हैं। इसका प्रकाशन सन् 1882 ई. है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने इस उपन्यास को हिन्दी का प्रथम उपन्यास माना है। इस उपन्यास में मदनमोहन नामक एक रईस व्यापारी के बुरी संगत में पड़ने पर पतन फिर सुधार की कहानी है। लाला श्रीनिवासदास की रचनाएँ - प्रह्ललाद चरित्र, तप्तासंवरण, संयोगिता स्वयंवर, रणधीर प्रेम मोहिनी।
B. ‘‘और बहुत जल्दी हो तो बिल करके काम चला लीजिए, जब तक कागज के घोड़े दौड़ते हैं। रुपे की क्या कमी है?" परीक्षा गुरु उपन्यास के अंतर्गत यह कथन लाला ब्रजकिशोर का है। परीक्षा गुरू उपन्यास के रचनाकार श्रीनिवासदास हैं। इसका प्रकाशन सन् 1882 ई. है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने इस उपन्यास को हिन्दी का प्रथम उपन्यास माना है। इस उपन्यास में मदनमोहन नामक एक रईस व्यापारी के बुरी संगत में पड़ने पर पतन फिर सुधार की कहानी है। लाला श्रीनिवासदास की रचनाएँ - प्रह्ललाद चरित्र, तप्तासंवरण, संयोगिता स्वयंवर, रणधीर प्रेम मोहिनी।

Explanations:

‘‘और बहुत जल्दी हो तो बिल करके काम चला लीजिए, जब तक कागज के घोड़े दौड़ते हैं। रुपे की क्या कमी है?" परीक्षा गुरु उपन्यास के अंतर्गत यह कथन लाला ब्रजकिशोर का है। परीक्षा गुरू उपन्यास के रचनाकार श्रीनिवासदास हैं। इसका प्रकाशन सन् 1882 ई. है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने इस उपन्यास को हिन्दी का प्रथम उपन्यास माना है। इस उपन्यास में मदनमोहन नामक एक रईस व्यापारी के बुरी संगत में पड़ने पर पतन फिर सुधार की कहानी है। लाला श्रीनिवासदास की रचनाएँ - प्रह्ललाद चरित्र, तप्तासंवरण, संयोगिता स्वयंवर, रणधीर प्रेम मोहिनी।