Correct Answer:
Option A - जब कंक्रीट पूर्णत: सघन नहीं होती है तो इसमें नमी प्रवेश कर जाती है, जिसके कारण प्रबलन छड़ों का संक्षारण होने लगता है। क्लोरीनीकरण तथा कार्बोनीकरण प्रबलन छड़ों में संक्षारण के लिए उत्तरदायी है। इसके परिणामस्वरूप संरचनाओं के किनारे, कोने तथा जोड फटने लगते है। जब छड़ों को जंग लग जाती है तो इसकी सतह पूल जाती है, जिससे कंक्रीट का आवरण फटने व उखड़ने लगता है और छड़े नंगी हो जाती है। ऐसा होने पर कंक्रीट तथा इस्पात का अभिलाग क्षीण पड़ जाता है और संरचना क्षति-ग्रस्त हो जाती है।
A. जब कंक्रीट पूर्णत: सघन नहीं होती है तो इसमें नमी प्रवेश कर जाती है, जिसके कारण प्रबलन छड़ों का संक्षारण होने लगता है। क्लोरीनीकरण तथा कार्बोनीकरण प्रबलन छड़ों में संक्षारण के लिए उत्तरदायी है। इसके परिणामस्वरूप संरचनाओं के किनारे, कोने तथा जोड फटने लगते है। जब छड़ों को जंग लग जाती है तो इसकी सतह पूल जाती है, जिससे कंक्रीट का आवरण फटने व उखड़ने लगता है और छड़े नंगी हो जाती है। ऐसा होने पर कंक्रीट तथा इस्पात का अभिलाग क्षीण पड़ जाता है और संरचना क्षति-ग्रस्त हो जाती है।