search
Q: Which of the following is one of the approaches to expound the importance of labour? श्रम के महत्व को प्रतिपादित करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सा दृष्टिकोणों में से एक है? I. The hand pump must have been a product of the experiences of a labourer. I. हैंडपंप एक मजदूर के अनुभवों का उत्पाद रहा होगा। II. The person who propounded the principle of the pulley must have drawn water from the well or lifted a weight. II. चरखी के सिद्धांत को प्रतिपादित करने वाले व्यक्ति ने कुएं से पानी निकाला होगा या वजन उठाया होगा।
  • A. Neither I nor II/ना ही I ना ही II
  • B. Only II/केवल II
  • C. Both I and II/I तथा II दोनों
  • D. Only I/केवल I
Correct Answer: Option C - श्रम के महत्व को प्रतिपादित करने के लिए निम्न दृष्टिकोण है– हैडंपंप एक मजदूर के अनुभवों का उत्पाद रहा होगा तथा चरखी के सिद्धान्त को प्रतिपादित करने वाले व्यक्ति ने कुएं से पानी निकाला होगा या वजन उठाया होगा क्योंकि किसी भी उपलब्धि का आधार श्रम है। श्रम के बगैर किसी भी क्षेत्र में स्थायी और पूर्ण सफलता अर्जित कर लेना असंभव है। श्रम की महत्ता का प्रतिपादन करते हुए एक नीतिकार ने कहा है, उद्यम करने से ही कार्यो की सिद्धि होती है। जीवन में सफलता आदि के लिए श्रम अनिवार्य है। अत: I तथा II दोनों सही है।
C. श्रम के महत्व को प्रतिपादित करने के लिए निम्न दृष्टिकोण है– हैडंपंप एक मजदूर के अनुभवों का उत्पाद रहा होगा तथा चरखी के सिद्धान्त को प्रतिपादित करने वाले व्यक्ति ने कुएं से पानी निकाला होगा या वजन उठाया होगा क्योंकि किसी भी उपलब्धि का आधार श्रम है। श्रम के बगैर किसी भी क्षेत्र में स्थायी और पूर्ण सफलता अर्जित कर लेना असंभव है। श्रम की महत्ता का प्रतिपादन करते हुए एक नीतिकार ने कहा है, उद्यम करने से ही कार्यो की सिद्धि होती है। जीवन में सफलता आदि के लिए श्रम अनिवार्य है। अत: I तथा II दोनों सही है।

Explanations:

श्रम के महत्व को प्रतिपादित करने के लिए निम्न दृष्टिकोण है– हैडंपंप एक मजदूर के अनुभवों का उत्पाद रहा होगा तथा चरखी के सिद्धान्त को प्रतिपादित करने वाले व्यक्ति ने कुएं से पानी निकाला होगा या वजन उठाया होगा क्योंकि किसी भी उपलब्धि का आधार श्रम है। श्रम के बगैर किसी भी क्षेत्र में स्थायी और पूर्ण सफलता अर्जित कर लेना असंभव है। श्रम की महत्ता का प्रतिपादन करते हुए एक नीतिकार ने कहा है, उद्यम करने से ही कार्यो की सिद्धि होती है। जीवन में सफलता आदि के लिए श्रम अनिवार्य है। अत: I तथा II दोनों सही है।