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Q: कामता प्रसाद गुरु ने बाह्य प्रयत्न के अनुसार व्यंजनों के कितने भेद माने हैं?
  • A. तीन
  • B. पाँच
  • C. चार
  • D. दो
Correct Answer: Option C - कामता प्रसाद गुरू ने बाह्य प्रयत्न के अनुसार व्यंजनों के चार भेद माने हैं। प्रयत्न के आधार पर किया गया विभाजन दो प्रकार का होता है। 1. आभ्यन्तर प्रयत्न 2. वाह्य प्रयत्न आभ्यन्तर प्रयत्न– इसके अन्तर्गत स्पर्श व्यंजन, स्पर्श-संघर्षी, ऊष्म व्यंजन, अन्तस्थ व्यंजन, पार्श्विक , लुंठित, उत्क्षिप्त, अर्धस्वर, अनुनासिक वर्ण आते हैं। बाह्य प्रयत्न– इसके अन्तर्गत घोष, अघोष, अल्पप्राण तथा महाप्राण वर्ण आते हैं।
C. कामता प्रसाद गुरू ने बाह्य प्रयत्न के अनुसार व्यंजनों के चार भेद माने हैं। प्रयत्न के आधार पर किया गया विभाजन दो प्रकार का होता है। 1. आभ्यन्तर प्रयत्न 2. वाह्य प्रयत्न आभ्यन्तर प्रयत्न– इसके अन्तर्गत स्पर्श व्यंजन, स्पर्श-संघर्षी, ऊष्म व्यंजन, अन्तस्थ व्यंजन, पार्श्विक , लुंठित, उत्क्षिप्त, अर्धस्वर, अनुनासिक वर्ण आते हैं। बाह्य प्रयत्न– इसके अन्तर्गत घोष, अघोष, अल्पप्राण तथा महाप्राण वर्ण आते हैं।

Explanations:

कामता प्रसाद गुरू ने बाह्य प्रयत्न के अनुसार व्यंजनों के चार भेद माने हैं। प्रयत्न के आधार पर किया गया विभाजन दो प्रकार का होता है। 1. आभ्यन्तर प्रयत्न 2. वाह्य प्रयत्न आभ्यन्तर प्रयत्न– इसके अन्तर्गत स्पर्श व्यंजन, स्पर्श-संघर्षी, ऊष्म व्यंजन, अन्तस्थ व्यंजन, पार्श्विक , लुंठित, उत्क्षिप्त, अर्धस्वर, अनुनासिक वर्ण आते हैं। बाह्य प्रयत्न– इसके अन्तर्गत घोष, अघोष, अल्पप्राण तथा महाप्राण वर्ण आते हैं।