Correct Answer:
Option B - जल की कठोरता– कैल्शियम तथा मैग्नीशियम के बाई-कार्बोनेट, कार्बोनेट, सल्फेट तथा क्लोराइड के पानी में घुले होने से पानी में कठोरता आ जाती है।
पानी में अनुमेय सीमा से अधिक कठोरता उपस्थित होने के कारण कपड़े धोने मे पानी के खर्च में वृद्धि होती है।
कठोर पानी में साबुन की झाग नहीं बनती है, अथवा बहुत कम बनता है।
(i) अस्थायी कठोरता– यह कठोरता कार्बोनेट या बाई-कार्बोनेट लवणों के कारण होती है। चूना मिलाकर अथवा पानी को उबालकर यह कठोरता हटाई जा सकती है।
(ii) स्थायी कठोरता– यह कठोरता कैल्शियम व मैग्नीशियम में सल्फेट व क्लोराइड की उपस्थिति के कारण होती है। पानी की स्थायी कठोरता को लाइम सोडा विधि और जियोलाइट विधि के द्वारा दूर किया जाता है। जियोलाइट प्रक्रिया से उपचार करने पर 0% कठोरता वाला जल प्राप्त किया जाता है।
B. जल की कठोरता– कैल्शियम तथा मैग्नीशियम के बाई-कार्बोनेट, कार्बोनेट, सल्फेट तथा क्लोराइड के पानी में घुले होने से पानी में कठोरता आ जाती है।
पानी में अनुमेय सीमा से अधिक कठोरता उपस्थित होने के कारण कपड़े धोने मे पानी के खर्च में वृद्धि होती है।
कठोर पानी में साबुन की झाग नहीं बनती है, अथवा बहुत कम बनता है।
(i) अस्थायी कठोरता– यह कठोरता कार्बोनेट या बाई-कार्बोनेट लवणों के कारण होती है। चूना मिलाकर अथवा पानी को उबालकर यह कठोरता हटाई जा सकती है।
(ii) स्थायी कठोरता– यह कठोरता कैल्शियम व मैग्नीशियम में सल्फेट व क्लोराइड की उपस्थिति के कारण होती है। पानी की स्थायी कठोरता को लाइम सोडा विधि और जियोलाइट विधि के द्वारा दूर किया जाता है। जियोलाइट प्रक्रिया से उपचार करने पर 0% कठोरता वाला जल प्राप्त किया जाता है।