Correct Answer:
Option B - क्षैतिज सतह पर गिरने वाले पानी की मात्रा को मापने के लिए वर्षा या वर्षामापी यंत्र का प्रयोग किया जाता है।
वर्षामापी यंत्र मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं-
1. साधारण या अनभिलेखी वर्षामापी (Crdinary or Non-recording raingauge.)
2. स्वत: अभिलेखी वर्षामापी(Self recording or Auto matic raingauge)
■ स्वत: अभिलेखी वर्षामापी - यह तीन प्रकार के होते हैं-
1. टिपिंग बकेट वर्षामापी
2.तुला प्रकार का वर्षामापी
3. प्लव प्रकार का वर्षामापी
■ फैदोमीटर का उपयोग समुद्र तल की गहराई मापने के लिए किया जाता है।
■ ऑस्मोस्कोप (Osmoscope) के द्वारा पानी का स्वाद एवं गंध (Taste and odour) ज्ञात किया जाता है।
B. क्षैतिज सतह पर गिरने वाले पानी की मात्रा को मापने के लिए वर्षा या वर्षामापी यंत्र का प्रयोग किया जाता है।
वर्षामापी यंत्र मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं-
1. साधारण या अनभिलेखी वर्षामापी (Crdinary or Non-recording raingauge.)
2. स्वत: अभिलेखी वर्षामापी(Self recording or Auto matic raingauge)
■ स्वत: अभिलेखी वर्षामापी - यह तीन प्रकार के होते हैं-
1. टिपिंग बकेट वर्षामापी
2.तुला प्रकार का वर्षामापी
3. प्लव प्रकार का वर्षामापी
■ फैदोमीटर का उपयोग समुद्र तल की गहराई मापने के लिए किया जाता है।
■ ऑस्मोस्कोप (Osmoscope) के द्वारा पानी का स्वाद एवं गंध (Taste and odour) ज्ञात किया जाता है।