Correct Answer:
Option D - बुद्ध ने सांसारिक दु:खों के सम्बन्ध में चार आर्य सत्यों (सच्चाइयाँ) का उपदेश दिया। इसे संस्कृत में ‘चत्वारि आर्यसत्यानि’ और पालि में ‘चत्तरि अरियसच्चानि’ कहते है।
भगवान बुद्ध के चार आर्य सत्य निम्न है–
(1) दु:ख - संसार में दु:ख है।
(2) दु:ख समुदाय – दु:ख का कारण है।
(3) दु:ख निरोध – दु:ख का निवारण है।
(4) दु:ख निरोधगामिनी प्रतिपदा– निवारण के लिये अष्टांगिक मार्ग है।
इन सांसारिक दु:खों से मुक्ति हेतु बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग का वर्णन किया है। ये हैं- सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाक , सम्यक कर्मान्त, सम्यक आजीव, सम्यक व्यायाम, सम्यक स्मृति, सम्यक समाधि।
D. बुद्ध ने सांसारिक दु:खों के सम्बन्ध में चार आर्य सत्यों (सच्चाइयाँ) का उपदेश दिया। इसे संस्कृत में ‘चत्वारि आर्यसत्यानि’ और पालि में ‘चत्तरि अरियसच्चानि’ कहते है।
भगवान बुद्ध के चार आर्य सत्य निम्न है–
(1) दु:ख - संसार में दु:ख है।
(2) दु:ख समुदाय – दु:ख का कारण है।
(3) दु:ख निरोध – दु:ख का निवारण है।
(4) दु:ख निरोधगामिनी प्रतिपदा– निवारण के लिये अष्टांगिक मार्ग है।
इन सांसारिक दु:खों से मुक्ति हेतु बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग का वर्णन किया है। ये हैं- सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाक , सम्यक कर्मान्त, सम्यक आजीव, सम्यक व्यायाम, सम्यक स्मृति, सम्यक समाधि।