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Q: सम्राट अशोक का पितामह कौन था?
  • A. चंद्रगुप्त मौर्य
  • B. बिन्दुसार
  • C. दशरथ
  • D. विताशोक
Correct Answer: Option A - सम्राट अशोक मौर्यवंश का एक महान शासक था। वह बिन्दुसार का पुत्र था, और चन्द्रगुप्त मौर्य का पौत्र था। इसे देवनामप्रिय एवं प्रियदर्शी आदि नामों से भी जाना जाता है। अपने राज्याभिषेक के आठवें वर्ष (261 ई. पू.) उसने कलिंग का युद्ध लड़ा और विजयी हुआ। इस युद्ध मेंं हुए भयंकर रक्तपात से आहत होकर उसने युद्ध का त्याग कर बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया। इसने भारत ही नही अपितु सम्पूर्ण एशिया में बौद्ध धर्म की शिक्षाओं का प्रचार किया। इसने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए सम्राट अशोक ने अपने पुत्र व पुत्री क्रमश: (महेन्द्र व संघमित्रा) को श्रीलंका भेजा था।
A. सम्राट अशोक मौर्यवंश का एक महान शासक था। वह बिन्दुसार का पुत्र था, और चन्द्रगुप्त मौर्य का पौत्र था। इसे देवनामप्रिय एवं प्रियदर्शी आदि नामों से भी जाना जाता है। अपने राज्याभिषेक के आठवें वर्ष (261 ई. पू.) उसने कलिंग का युद्ध लड़ा और विजयी हुआ। इस युद्ध मेंं हुए भयंकर रक्तपात से आहत होकर उसने युद्ध का त्याग कर बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया। इसने भारत ही नही अपितु सम्पूर्ण एशिया में बौद्ध धर्म की शिक्षाओं का प्रचार किया। इसने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए सम्राट अशोक ने अपने पुत्र व पुत्री क्रमश: (महेन्द्र व संघमित्रा) को श्रीलंका भेजा था।

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सम्राट अशोक मौर्यवंश का एक महान शासक था। वह बिन्दुसार का पुत्र था, और चन्द्रगुप्त मौर्य का पौत्र था। इसे देवनामप्रिय एवं प्रियदर्शी आदि नामों से भी जाना जाता है। अपने राज्याभिषेक के आठवें वर्ष (261 ई. पू.) उसने कलिंग का युद्ध लड़ा और विजयी हुआ। इस युद्ध मेंं हुए भयंकर रक्तपात से आहत होकर उसने युद्ध का त्याग कर बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया। इसने भारत ही नही अपितु सम्पूर्ण एशिया में बौद्ध धर्म की शिक्षाओं का प्रचार किया। इसने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए सम्राट अशोक ने अपने पुत्र व पुत्री क्रमश: (महेन्द्र व संघमित्रा) को श्रीलंका भेजा था।