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Q: ‘पौन मया करि घूँघट टारै, दया करी दामिनी दीप देखावै’- काव्य पंक्ति किस कवि की है?
  • A. नेही नागरिदास
  • B. पद्माकर
  • C. देव
  • D. ग्वाल
Correct Answer: Option A - ‘पौन मया करि घूँघट टारै,दया करी दामिनी दीप देखावै’ उपर्युक्त काव्य पंक्ति ‘नेही नागरीदास’ की है। नेही नागरीदास हिन्दी साहित्य के जाज्वल्यमान नक्षत्र हैं। नागरीदास जी का जन्म संवत् 1590 के आसपास माना जाता है। इनकी गणना ‘राधावल्लभ संप्रदाय’ के प्रमुख भक्त कवियों में की जाती है।
A. ‘पौन मया करि घूँघट टारै,दया करी दामिनी दीप देखावै’ उपर्युक्त काव्य पंक्ति ‘नेही नागरीदास’ की है। नेही नागरीदास हिन्दी साहित्य के जाज्वल्यमान नक्षत्र हैं। नागरीदास जी का जन्म संवत् 1590 के आसपास माना जाता है। इनकी गणना ‘राधावल्लभ संप्रदाय’ के प्रमुख भक्त कवियों में की जाती है।

Explanations:

‘पौन मया करि घूँघट टारै,दया करी दामिनी दीप देखावै’ उपर्युक्त काव्य पंक्ति ‘नेही नागरीदास’ की है। नेही नागरीदास हिन्दी साहित्य के जाज्वल्यमान नक्षत्र हैं। नागरीदास जी का जन्म संवत् 1590 के आसपास माना जाता है। इनकी गणना ‘राधावल्लभ संप्रदाय’ के प्रमुख भक्त कवियों में की जाती है।