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Q: ‘‘मानव अथवा प्रकृति के सूक्ष्म, किन्तु व्यक्त सौन्दर्य में आध्यात्मिक छाया का भान मेरे विचार से छायावाद की एक सर्वमान्य व्याख्या हो सकती है।’’ यह किसका कथन है:
  • A. सुमित्रानंदन पंत
  • B. डॉ. नगेन्द्र
  • C. नंददुलारे वाजपेयी
  • D. नामवर सिंह
Correct Answer: Option C - ‘‘मानव अथवा प्रकृति के सूक्ष्म, किन्तु व्यक्त सौन्दर्य में आध्यात्मिक छाया का भान मेरे विचार से छायावाद की एक सर्वमान्य व्याख्या हो सकती है।’’ यह कथन नंददुलारे वाजपेयी का है। डॉ. नगेन्द्र- छायावाद स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह है। डॉ. नामवर सिंह- छायावाद उस राष्ट्रीय जागरण की अभिव्यक्ति है जो एक ओर पुरानी कड़ियों से मुक्ति चाहता था और दूसरी ओर विदेशी पराधीनता से।
C. ‘‘मानव अथवा प्रकृति के सूक्ष्म, किन्तु व्यक्त सौन्दर्य में आध्यात्मिक छाया का भान मेरे विचार से छायावाद की एक सर्वमान्य व्याख्या हो सकती है।’’ यह कथन नंददुलारे वाजपेयी का है। डॉ. नगेन्द्र- छायावाद स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह है। डॉ. नामवर सिंह- छायावाद उस राष्ट्रीय जागरण की अभिव्यक्ति है जो एक ओर पुरानी कड़ियों से मुक्ति चाहता था और दूसरी ओर विदेशी पराधीनता से।

Explanations:

‘‘मानव अथवा प्रकृति के सूक्ष्म, किन्तु व्यक्त सौन्दर्य में आध्यात्मिक छाया का भान मेरे विचार से छायावाद की एक सर्वमान्य व्याख्या हो सकती है।’’ यह कथन नंददुलारे वाजपेयी का है। डॉ. नगेन्द्र- छायावाद स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह है। डॉ. नामवर सिंह- छायावाद उस राष्ट्रीय जागरण की अभिव्यक्ति है जो एक ओर पुरानी कड़ियों से मुक्ति चाहता था और दूसरी ओर विदेशी पराधीनता से।