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Q: The water in the soil which is in excess of the hygroscopic and capillary water and which can move freely downwards when the soil is porous and drainage available is called- मिट्टी में मौजूद वह जल, जो हाइग्रोस्कोपिक और केशिकीय जल से अतिरिक्तता में मौजूद है और जो मिट्टी में रंध्र और निकास मौजूद होने पर मुक्त रूप से नीचे की ओर जा सकता है, उसे क्या कहा जाता है–
  • A. Free water/मुक्त जल
  • B. Hygrosopic water/हाइग्रोस्कोपिक जल
  • C. Firing water/फायिंरग वाटर
  • D. Capillary water/केशिकीय जल
Correct Answer: Option A - मुक्त जल (Free water)–जो पानी मृदा के कणों से गुरुत्व प्रभाव के कारण बह सकता है, स्वतंत्र या मुक्त जल कहते हैं। मृदा में रंध्र तथा उचित निकास व्यवस्था होने पर यह जल शीघ्र ही मृदा कणों से निकल जाता है। इस जल को गुरुत्व जल भी कहते हैं। आद्र्रताग्राही जल (Hygroscopic water)–यह पानी विद्युत-रासायनिक बलों के कारण मृदा के कणों से संयुक्त रहता है तथा गुरुत्व या केशिकीय बलों के कारण भी यह मृदा के कणों से अलग नहीं होता है। (मृदा को 105⁰C से 110⁰C तक गर्म करने पर ही यह पानी इससे अलग किया जा सकता है।) केशिकीय जल (Capillary water)–यह पानी आण्विक आकर्षण के कारण रन्ध्रों में विद्यमान रहता है। इसे मृदा से अपवाहित नहीं किया जा सकता। यह पौधे की बढ़ोत्तरी के लिए इसकी जड़ों में उपलब्ध रहता है। जहाँ से यह केशिकीय क्रिया द्वारा पौधों की शाखाओं और पत्तियों तक पहुँचता रहता है।
A. मुक्त जल (Free water)–जो पानी मृदा के कणों से गुरुत्व प्रभाव के कारण बह सकता है, स्वतंत्र या मुक्त जल कहते हैं। मृदा में रंध्र तथा उचित निकास व्यवस्था होने पर यह जल शीघ्र ही मृदा कणों से निकल जाता है। इस जल को गुरुत्व जल भी कहते हैं। आद्र्रताग्राही जल (Hygroscopic water)–यह पानी विद्युत-रासायनिक बलों के कारण मृदा के कणों से संयुक्त रहता है तथा गुरुत्व या केशिकीय बलों के कारण भी यह मृदा के कणों से अलग नहीं होता है। (मृदा को 105⁰C से 110⁰C तक गर्म करने पर ही यह पानी इससे अलग किया जा सकता है।) केशिकीय जल (Capillary water)–यह पानी आण्विक आकर्षण के कारण रन्ध्रों में विद्यमान रहता है। इसे मृदा से अपवाहित नहीं किया जा सकता। यह पौधे की बढ़ोत्तरी के लिए इसकी जड़ों में उपलब्ध रहता है। जहाँ से यह केशिकीय क्रिया द्वारा पौधों की शाखाओं और पत्तियों तक पहुँचता रहता है।

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मुक्त जल (Free water)–जो पानी मृदा के कणों से गुरुत्व प्रभाव के कारण बह सकता है, स्वतंत्र या मुक्त जल कहते हैं। मृदा में रंध्र तथा उचित निकास व्यवस्था होने पर यह जल शीघ्र ही मृदा कणों से निकल जाता है। इस जल को गुरुत्व जल भी कहते हैं। आद्र्रताग्राही जल (Hygroscopic water)–यह पानी विद्युत-रासायनिक बलों के कारण मृदा के कणों से संयुक्त रहता है तथा गुरुत्व या केशिकीय बलों के कारण भी यह मृदा के कणों से अलग नहीं होता है। (मृदा को 105⁰C से 110⁰C तक गर्म करने पर ही यह पानी इससे अलग किया जा सकता है।) केशिकीय जल (Capillary water)–यह पानी आण्विक आकर्षण के कारण रन्ध्रों में विद्यमान रहता है। इसे मृदा से अपवाहित नहीं किया जा सकता। यह पौधे की बढ़ोत्तरी के लिए इसकी जड़ों में उपलब्ध रहता है। जहाँ से यह केशिकीय क्रिया द्वारा पौधों की शाखाओं और पत्तियों तक पहुँचता रहता है।