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Q: सन्ध्याकार नन्दी के प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘रामचरित’ की विषयवस्तु का सम्बन्ध है
  • A. पालवंशी रामपाल से
  • B. चालुक्यवंशी विक्रमादित्य VI से
  • C. गुर्जर-प्रतिहार वंश के रामचन्द्र से
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option A - सन्ध्याकार नन्दी के प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘रामचरित’ की विषयवस्तु का सम्बन्ध पालवंशी शासक रामपाल से था। संध्याकर नन्दी पाल राजाओं द्वारा आश्रय प्राप्त एक विद्वान थे। इन्होंने अपने ग्रंथ ‘रामपाल चरित’ या ‘रामचरित’ में राजा रामपाल की उपलब्धियों का वर्णन किया है। इस ग्रंथ में पाल शासकों को ‘समुद्रदेव की संतान’ कहा गया है। इस ग्रंथ में बौद्ध साहित्य की उन्नति और तिब्बत से भारत आये विद्धानों का वर्णन भी मिलता है। विक्रमशिला शिक्षा केन्द्र का संस्थापक पाल शासक धर्मपाल था। ओदन्तपुरी शिक्षा केन्द्र पाल शासकों के अधीन बिहार राज्य में स्थित था।
A. सन्ध्याकार नन्दी के प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘रामचरित’ की विषयवस्तु का सम्बन्ध पालवंशी शासक रामपाल से था। संध्याकर नन्दी पाल राजाओं द्वारा आश्रय प्राप्त एक विद्वान थे। इन्होंने अपने ग्रंथ ‘रामपाल चरित’ या ‘रामचरित’ में राजा रामपाल की उपलब्धियों का वर्णन किया है। इस ग्रंथ में पाल शासकों को ‘समुद्रदेव की संतान’ कहा गया है। इस ग्रंथ में बौद्ध साहित्य की उन्नति और तिब्बत से भारत आये विद्धानों का वर्णन भी मिलता है। विक्रमशिला शिक्षा केन्द्र का संस्थापक पाल शासक धर्मपाल था। ओदन्तपुरी शिक्षा केन्द्र पाल शासकों के अधीन बिहार राज्य में स्थित था।

Explanations:

सन्ध्याकार नन्दी के प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘रामचरित’ की विषयवस्तु का सम्बन्ध पालवंशी शासक रामपाल से था। संध्याकर नन्दी पाल राजाओं द्वारा आश्रय प्राप्त एक विद्वान थे। इन्होंने अपने ग्रंथ ‘रामपाल चरित’ या ‘रामचरित’ में राजा रामपाल की उपलब्धियों का वर्णन किया है। इस ग्रंथ में पाल शासकों को ‘समुद्रदेव की संतान’ कहा गया है। इस ग्रंथ में बौद्ध साहित्य की उन्नति और तिब्बत से भारत आये विद्धानों का वर्णन भी मिलता है। विक्रमशिला शिक्षा केन्द्र का संस्थापक पाल शासक धर्मपाल था। ओदन्तपुरी शिक्षा केन्द्र पाल शासकों के अधीन बिहार राज्य में स्थित था।