Correct Answer:
Option B - ह्वेन सांग (629-645 ई.) चीनी यात्री था जो बौद्ध ग्रन्थों का संकलन करने के लिए ईसा की सातवीं सदी में भारत आया और लगभग 15 वर्ष यहाँ रहा। उसने अपने यात्रा संस्मरण को एक पुस्तक के रूप में ‘सी-यू-की’ नाम से संकलित किया है। ह्वेनसांग के अन्य नाम ‘युवानच्वांग’ या ‘श्वानचांग’, ‘शाक्यमुनि’ एवं यात्रियों का राजकुमार था। ह्वेनसांग ने डेढ़ वर्षों तक नालन्दा विश्वविद्यालय में रह कर अध्ययन किया। इसके समय में यहाँ के प्राचार्य शीलभद्र थे।
B. ह्वेन सांग (629-645 ई.) चीनी यात्री था जो बौद्ध ग्रन्थों का संकलन करने के लिए ईसा की सातवीं सदी में भारत आया और लगभग 15 वर्ष यहाँ रहा। उसने अपने यात्रा संस्मरण को एक पुस्तक के रूप में ‘सी-यू-की’ नाम से संकलित किया है। ह्वेनसांग के अन्य नाम ‘युवानच्वांग’ या ‘श्वानचांग’, ‘शाक्यमुनि’ एवं यात्रियों का राजकुमार था। ह्वेनसांग ने डेढ़ वर्षों तक नालन्दा विश्वविद्यालय में रह कर अध्ययन किया। इसके समय में यहाँ के प्राचार्य शीलभद्र थे।