Explanations:
उत्तर वैदिक काल में राजा की कोई नियमित सेना नहीं थी। युद्ध के समय संगठित की गयी सेना को नागरिक सेना कहते थे। अथर्ववेद में सभा एवं समिति को प्रजापति की दो पुत्रियों के समान माना गया है। उत्तर वैदिक काल में सामवेद, यजुर्वेद एवं अथर्ववेद तथा ब्राह्मण ग्रन्थों आरण्यक एवं उपनिषदों की रचना हुई।