Correct Answer:
Option B - सहसंयोजक यौगिकों में अणुओं के मध्य आयनिक यौगिकों के अणुओं की अपेक्षा दुर्बल आकर्षण बल होता है। इसलिए उनके आयनिक यौगिकों की तुलना मे कम पिघलने के बिंदु और उबलते बिंदु होते है।
सहसंयोजी यौगिकों में बाध्यकारी अणुओं के बीच कमजोर आकर्षण बल होता हैं इस प्रकार बंधन के बल को तोड़ने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि सहसंयोजक यौगिकों का गलनांक और क्वथनांक कम होता है।
B. सहसंयोजक यौगिकों में अणुओं के मध्य आयनिक यौगिकों के अणुओं की अपेक्षा दुर्बल आकर्षण बल होता है। इसलिए उनके आयनिक यौगिकों की तुलना मे कम पिघलने के बिंदु और उबलते बिंदु होते है।
सहसंयोजी यौगिकों में बाध्यकारी अणुओं के बीच कमजोर आकर्षण बल होता हैं इस प्रकार बंधन के बल को तोड़ने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि सहसंयोजक यौगिकों का गलनांक और क्वथनांक कम होता है।