Select the combination of letters that when sequentially placed from left to right in the blanks of the given series will complete the series. उन अक्षरों के संयोजन का चयन करें जो दी गई शृंखला के रिक्त स्थान में बाएं से दाएं क्रमिक रूप से रखे जाने पर शृंखला को पूरा करेंगे। _ om_ onm _mnon _ omn _ n
Dinosaurs went extinct about 65 million years ago at the end of the .............. period.
` 1,470 की राशि अनंत और मोहन के बीच 3:4 के अनुपात में बाँटी जाती है। मोहन को कितनी राशि प्राप्त हुई?
लगातार तीन वर्षों तक, एक उत्पाद की कीमत क्रमश: Rs.146 प्रति लीटर, Rs.292 प्रति लीटर और Rs.365 प्रति लीटर था। यदि एक आम आदमी उस उत्पाद पर प्रति वर्ष औसतन Rs.16060 खर्च करता है, तो तीन वर्षों के लिए उस उत्पाद का प्रति लीटर औसत मूल्य कितना है? (Rs. में)
‘‘आर्यभट्ट नक्षत्रशाला’’ स्थित है
किसी नाव की चाल शांत जल में 12 km/hr है। यदि नाव जल की धारा की विपरीत दिशा में 38 km की दूरी 4 घंटे में तय करती है, तो धारा की चाल km/hr में कितनी है?
Which present day Indian state came into existence as the Mysore state in 1953?
Select the most appropriate option that can substitute the underlined segment in the given sentence. She finished her quickly breakfast and rushed to school.
RF = 200:1 represents a
निर्देश- प्रश्न संख्या (162 से 169) निम्नलिखितं गद्यांशं पठित्वा अष्टप्रश्नानां यथोचितं विकल्पं चित्वा उत्तराणि देयानि- ते तत्र विश्वासमापन्ना: तात! मातुल! भ्रात! इति ब्रुवाणा अहं पूर्वमहं पूर्वमिति समन्तात् परितस्थु:। सोऽपि दृष्टाशय: क्रमेण तान् पृष्ठे आरोप्य जलाशयस्य नातिदूरे शिलां समासाद्य तस्यामाक्षिप्य स्वेच्छया भक्षयित्वा भूयोऽपि जलाशयं समासाद्य जलचराणां मिथ्यावार्तासन्देशकैर्मनांसि रञ्जयन्नित्यामिवाहारवृत्तिमकरोत्। अन्यस्मिन् दिने च कुलीरकेणोक्त:- ‘‘माम! मया सह ते प्रथम: स्नेहसम्भाष: सञ्जात:। तत् किं मां परित्यज्य अन्यान्नयसि। तस्मादद्य मे प्राणत्राणं कुरु’’ तदाकरण्य सोऽपि दुष्टाशयश्चिन्तितवान् । ‘‘निर्विणोऽहं मत्स्यमांसादनेन। तदद्य एनं कुलीरकं व्यञ्जनस्थाने करोमि’’। इति विचिन्त्य तं पृष्ठे समारोप्य तां वध्यशिलामुद्दिश्य प्रस्थित:। कुलीरकोऽपि दूरादेवास्थिपर्वतं शिलाश्रयमवलोक्य मत्स्यास्थीनि परिज्ञाय तमपृच्छत् - ‘‘माम! कियद्दूरे स जलाशय:? मदीयभारेण अतिश्रान्तस्त्वं तत् कथय’’। सोऽपि मन्दधीर्जलचरोऽप्यमिति मत्वा स्थले न प्रभवतीति सस्मितमिदमाह- ‘‘कुलीरक!’’ कुतोऽन्यो जलाशय: मम प्राणयात्रेयम् , तस्मात् स्मय्र्यतामात्मनोऽभीष्टदेवता। त्वामपि अस्यां शिलायां निक्षिप्य भक्षयिष्यामि’’। इत्युक्तवति तस्मिन् स्ववदनदंशद्वयेन मृणालनालधवलायां मृदुग्रीवायां गृहीतो मृतश्च। अथ स तां बकग्रीवां समादाय शनै: शनै: तज्जलाशयमाससाद। तत: सर्वैरेव जलचरै: पृष्ट:- ‘‘भो: कुलीरक! किं निवृत्तस्त्वम्?’’ स मातुलोऽपि न आयात:? तत् किं चिरयति? वयं सर्वे सोत्सुका: कृतक्षणास्ति ष्ठाम:’’। एवं तैरभिहिते कुलीरकोऽपि विहस्योवाच- ‘‘मूर्खा: सर्वे जलचरास्तेन मिथ्यावादिना वञ्चयित्वा नातिदूरे शिलातले प्रक्षिप्य भक्षिता:। तन्मया आयु: शेषतया तस्य विश्वासघातकस्य अभिप्रायं ज्ञात्वा ग्रीवेयमानीता। तदलं सम्भ्रमेण। अधुना सर्वजलचराणां क्षेमं भविष्यति’’। अतोऽहंब्रवीमि- ‘‘भक्षयित्वा बहून् मत्स्यान्’’ इति। अयम् शब्दस्य किं निर्वचनं समीचीनम् ?
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