Correct Answer:
Option C - आचार्य मम्मटस्य मतानुसारं, काव्यशास्त्रे ‘ध्वनिरिति’ शब्द: ‘व्याकरणशास्त्रात्’ आगत:।
आचार्य मम्मट के मतानुसार, काव्यशास्त्र में ‘ध्वनि’ है ऐसा शब्द व्याकरण शास्त्र से आया है अर्थात् वैयाकरणों ने प्रधानभूत ‘स्फोट’ रूप व्यङ्गय की अभिव्यक्ति कराने में समर्थ शब्द के लिए ‘ध्वनि’ इस पद का प्रयोग किया था, अत: ‘स्फोटवाद’ वैयाकरणों का प्रमुख सिद्धान्त है। ध्वनि सिद्धान्त की स्थापना आनन्दवर्धन ने की तथा इसके प्रतिस्थापन आचार्य मम्मट हैं।
रस सिद्धान्त के जनक भरतमुनि हैं और इसके व्याख्याकार भट्टलोल्लट का ‘उत्पत्तिवाद’ मीमांसाशास्त्र पर आधारित, शंकुक का ‘अनुमितिवाद’ न्यायशास्त्र पर, भट्टनायक का ‘भुक्तिवाद’ सांख्यशास्त्र पर तथा अभिनवगुप्त का ‘अभिव्यक्तिवाद’ शैव वेदान्तशास्त्र पर आधारित है।
C. आचार्य मम्मटस्य मतानुसारं, काव्यशास्त्रे ‘ध्वनिरिति’ शब्द: ‘व्याकरणशास्त्रात्’ आगत:।
आचार्य मम्मट के मतानुसार, काव्यशास्त्र में ‘ध्वनि’ है ऐसा शब्द व्याकरण शास्त्र से आया है अर्थात् वैयाकरणों ने प्रधानभूत ‘स्फोट’ रूप व्यङ्गय की अभिव्यक्ति कराने में समर्थ शब्द के लिए ‘ध्वनि’ इस पद का प्रयोग किया था, अत: ‘स्फोटवाद’ वैयाकरणों का प्रमुख सिद्धान्त है। ध्वनि सिद्धान्त की स्थापना आनन्दवर्धन ने की तथा इसके प्रतिस्थापन आचार्य मम्मट हैं।
रस सिद्धान्त के जनक भरतमुनि हैं और इसके व्याख्याकार भट्टलोल्लट का ‘उत्पत्तिवाद’ मीमांसाशास्त्र पर आधारित, शंकुक का ‘अनुमितिवाद’ न्यायशास्त्र पर, भट्टनायक का ‘भुक्तिवाद’ सांख्यशास्त्र पर तथा अभिनवगुप्त का ‘अभिव्यक्तिवाद’ शैव वेदान्तशास्त्र पर आधारित है।