Correct Answer:
Option D - अनावृतबीजी अर्थात् जिम्नोस्पर्म ऐसे पौधे को कहते है, जिनके बीज में आवरण या कवच नहीं पाया जाता है। इसमें नग्न बीज आते है। इनके प्रमुख लक्षण निम्न है–
(i) ये मरूद्भिद् होते हैं।
(ii) वायु परागण होते हैं।
(iii) जननांग एकलिंगी होते हैं।
आवृतबीजी वे पुष्पीय पौधे होते हैं, जिनमें बीज फलों के अन्दर रहते हैं। इस वर्ग के पौधों को शाक, झाड़ी या वृक्ष में विभाजित किया जा सकता है। इनके प्रमुख लक्षण है–
(i) दोहरे निषेचन की क्रिया होती है।
(ii) प्रजनन अंग पुष्प होते हैं।
(iii) स्थलीय एवं जलीय दोनों प्रकार के पौधे होते है।
इस प्रकार कथन I एवं कथन II सही नहीं है।
D. अनावृतबीजी अर्थात् जिम्नोस्पर्म ऐसे पौधे को कहते है, जिनके बीज में आवरण या कवच नहीं पाया जाता है। इसमें नग्न बीज आते है। इनके प्रमुख लक्षण निम्न है–
(i) ये मरूद्भिद् होते हैं।
(ii) वायु परागण होते हैं।
(iii) जननांग एकलिंगी होते हैं।
आवृतबीजी वे पुष्पीय पौधे होते हैं, जिनमें बीज फलों के अन्दर रहते हैं। इस वर्ग के पौधों को शाक, झाड़ी या वृक्ष में विभाजित किया जा सकता है। इनके प्रमुख लक्षण है–
(i) दोहरे निषेचन की क्रिया होती है।
(ii) प्रजनन अंग पुष्प होते हैं।
(iii) स्थलीय एवं जलीय दोनों प्रकार के पौधे होते है।
इस प्रकार कथन I एवं कथन II सही नहीं है।