Q: निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों (प्र. सं. 187 से 195) में सबसे उचित विकल्प चुनिए। सारा संसार नीले गगन के तले अनंत काल से रहता आया है। हम थोड़ी दूरी पर ही देखते हैं क्षितिज तक, जहाँ धरती और आकाश हमें मिलते दिखाई देते हैं। लेकिन जब वहाँ पहुँचते हैं, तो यह नजारा आगे खिसकता चला जाता है और इस नजारे का कोई ओर-छोर हमें नहीं दिखाई देता है। ठीक इसी तरह हमारा जीवन भी है। जिंदगी की न जाने कितनी उपमाएँ दी जा चुकी हैं, लेकिन कोई भी उपमा पूर्ण नहीं मानी गई, क्योंकि जिंदगी के इतने पक्ष हैं कि कोई भी उपमा उस पर पूरी तरह फिट नहीं बैठती। बर्नार्ड शॉ जीवन को एक खुली किताब मानते थे, और यह भी मानते थे कि सभी जीवों को समान रूप से जीने का हक है। वह चाहते थे कि इंसान अपने स्वार्थ में अंधा होकर किसी दूसरे जीव के जीने का हक न मारे। यदि इंसान ऐसा करता है, तो यह बहुत बड़ा अन्याय है। हमारे विचार स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे से मेल नहीं खाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि हम दूसरों को उसके जीने के हक में वंचित कर दें। यह खुला आसमान, यह प्रकृति और यह पूरा भू-मंडल हमें दरअसल यही बता रहा है कि हाथी से लेकर चींटी तक सभी को समान रूप से जीवन बिताने का हक है। जिस तरह से खुले आसमान के नीचे हर प्राणी बिना किसी डर के जीने, साँस लेने का अधिकारी है, उसी तरह से मानव-मात्र का स्वभाव भी होना चाहिए कि वह अपने जीने के साथ दूसरों से उनके जीने का हक न छीने। यह आसमान हमें जिस तरह से भय से छुटकारा दिलाता है, उसी तरह से हमें भी मानव-जाति से इतर जीवों को डर से छुटकारा दिलाकर उन्हें जीने के लिए पूरा अवसर देना चाहिए। दूसरों के जीने के हक को छीनने से बड़ा अपराध या पाप कुछ नहीं हो सकता। आसमान हमें दिलाता है -
A.
रक्षा करने का वचन
B.
साथ-साथ रहने का अनुशासन
C.
भय से छुटकारे का आश्वासन
D.
भयभीत न करने का आग्रह
Correct Answer:
Option C - खुला आसमान यह स्पष्ट संकेत करता है कि सर्वत्र व्याप्त ईश्वर का साम्राज्य है इसलिए भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।
C. खुला आसमान यह स्पष्ट संकेत करता है कि सर्वत्र व्याप्त ईश्वर का साम्राज्य है इसलिए भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।
Explanations:
खुला आसमान यह स्पष्ट संकेत करता है कि सर्वत्र व्याप्त ईश्वर का साम्राज्य है इसलिए भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।
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