search
Q: निम्न में से मृच्छकटिक का सहवचन है
  • A. सुखं हि दु:खान्यनुभूय शोभते
  • B. विभवाऽनुगता भार्या
  • C. शून्यमपुत्रस्य गृहम्
  • D. उपर्युक्त तीनों
Correct Answer: Option D - सुखं हि दु:खान्यनुभूय शोभते, विभवाऽनुगता भार्या तथा शून्यमपुत्रस्य गृहम् उपर्युक्त तीनों ही मृच्छकटिक का सहवचन है। मृच्छकटिक महाकवि शूद्रक की एकमात्र कृति है जो रूपक का एक भेद प्रकरण ग्रन्थ है जिसमें 10 अङ्क है। इसका नायक चारुदत्त तथा नायिका वसन्तसेना (गणिका) है।
D. सुखं हि दु:खान्यनुभूय शोभते, विभवाऽनुगता भार्या तथा शून्यमपुत्रस्य गृहम् उपर्युक्त तीनों ही मृच्छकटिक का सहवचन है। मृच्छकटिक महाकवि शूद्रक की एकमात्र कृति है जो रूपक का एक भेद प्रकरण ग्रन्थ है जिसमें 10 अङ्क है। इसका नायक चारुदत्त तथा नायिका वसन्तसेना (गणिका) है।

Explanations:

सुखं हि दु:खान्यनुभूय शोभते, विभवाऽनुगता भार्या तथा शून्यमपुत्रस्य गृहम् उपर्युक्त तीनों ही मृच्छकटिक का सहवचन है। मृच्छकटिक महाकवि शूद्रक की एकमात्र कृति है जो रूपक का एक भेद प्रकरण ग्रन्थ है जिसमें 10 अङ्क है। इसका नायक चारुदत्त तथा नायिका वसन्तसेना (गणिका) है।