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Q: निर्देश: (211-219): निम्नालिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। दरअसल हम अपनी समस्याओं की चर्चा बहुत बढ़ा-च़ढ़ाकर करते हैं। समस्याएँ आने पर हम दूसरों की सहानुभूति चाहते हैंं लेकिन सहानुभूति या दया से कोई समस्या हल नहीं होती। दरसल हम मुश्किलों का रोना रोते हैं, लेकिन कभी समाधान के बारे में नहीं सोचते। हम हथियार डालते हुए यह मान लेते हैं, जैसे बड़ी भारी मुसीबत आ गई हो। दिन-रात इसी मुसीबत के बारे में सोचते हैं, समस्या दिलों-दिमाग पर पूरी तरह छा जाती हैं इस पूरी प्रक्रिया में स्वयं द्वारा किए गए कार्यों का मूल्यांकन करना भूल जाते हैं। यदि हम ऐसा करें, तो हो सकता है कि ऐसी स्थिति से बाहर निकलने में मदद मिल जाए। परिस्थितियों का ठीक-ठाक मूल्यांकन करके आप आसानी से समाधान तक पहुँच सकते हैं। किसी भी समस्या का हल उसकी जड़ में होता है। गद्यांश के अनुसार हम किसकी चर्चा बढ़ा-चढ़ाकर करते हैं?
  • A. स्वयं की सफलताओं की।
  • B. स्वयं की समस्याओं की।
  • C. स्वयं के परिवार की।
  • D. आत्मप्रशंसा की।
Correct Answer: Option B - गद्यांश के अनुसार हम स्वयं की समस्याओं की चर्चा बढ़ा-चढ़ाकर करते हैं। समस्याएँ आने पर हम दूसरों की सहानुभूति चाहते हैं। लेकिन सहानुभूति या दया कोई समस्या का हल नहीं होती।
B. गद्यांश के अनुसार हम स्वयं की समस्याओं की चर्चा बढ़ा-चढ़ाकर करते हैं। समस्याएँ आने पर हम दूसरों की सहानुभूति चाहते हैं। लेकिन सहानुभूति या दया कोई समस्या का हल नहीं होती।

Explanations:

गद्यांश के अनुसार हम स्वयं की समस्याओं की चर्चा बढ़ा-चढ़ाकर करते हैं। समस्याएँ आने पर हम दूसरों की सहानुभूति चाहते हैं। लेकिन सहानुभूति या दया कोई समस्या का हल नहीं होती।