Correct Answer:
Option A - ‘देवा: महर्षेर्दधीचे: अस्थिभि: वङ्कानिर्माणम् अकुर्वन्’ वृत्रासुरं हन्तुम् उपायम् अकरोत्। देवताओं ने महर्षि दधीचि की अस्थियों से वङ्का का निर्माण करके वृत्रासुर को मारने का उपाय किया।
हन्तुम् - हन् + तुमुन् - तुमुन् (तुम्) निमित्तार्थक ‘के लिए’ अर्थात् क्रिया को करने के लिए, इस अर्थ में धातु के साथ तुमुन् प्रत्यय लगता है। जब दो क्रिया पदों का कर्ता एक होता है तथा एक क्रिया दूसरी क्रिया का प्रयोजन या निमित्त होती है तो निमित्तार्थक क्रिया पद में तुमुन् प्रत्यय होता है। समय, वेला आदि कालवाची शब्दों के योग में भी धातुओं से तुमुन् प्रत्यय होता है।
उदाहरण- गम् + तुमुन् = गन्तुम्, पा + तुमुन् = पातुम्,
स्ना + तुमुन् = स्नातुम्, दा + तुमुन् = दातुम् इत्यादि।
A. ‘देवा: महर्षेर्दधीचे: अस्थिभि: वङ्कानिर्माणम् अकुर्वन्’ वृत्रासुरं हन्तुम् उपायम् अकरोत्। देवताओं ने महर्षि दधीचि की अस्थियों से वङ्का का निर्माण करके वृत्रासुर को मारने का उपाय किया।
हन्तुम् - हन् + तुमुन् - तुमुन् (तुम्) निमित्तार्थक ‘के लिए’ अर्थात् क्रिया को करने के लिए, इस अर्थ में धातु के साथ तुमुन् प्रत्यय लगता है। जब दो क्रिया पदों का कर्ता एक होता है तथा एक क्रिया दूसरी क्रिया का प्रयोजन या निमित्त होती है तो निमित्तार्थक क्रिया पद में तुमुन् प्रत्यय होता है। समय, वेला आदि कालवाची शब्दों के योग में भी धातुओं से तुमुन् प्रत्यय होता है।
उदाहरण- गम् + तुमुन् = गन्तुम्, पा + तुमुन् = पातुम्,
स्ना + तुमुन् = स्नातुम्, दा + तुमुन् = दातुम् इत्यादि।