Q: निर्देश (166-174): निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। व्यक्ति के जीवन में संतोष का बहुत महत्त्व है। संतोषी व्यक्ति सुखी रहता है। असंतोष सब व्याधियों की जड़ है। महात्मा कबीर ने कहा है कि धन-दौलत से कभी संतोष नहीं मिलता। संतोषरूपी धन मिलने पर समस्त वैभव धूल के समान प्रतीत होता है। व्यक्ति जितना अधिक धन पाता जाता है, उतना ही असंतोष उपजता जाता है। यह असंतोष मानसिक तनाव उत्पन्न करता है जो अनेक रोगों की जड़ है। धन व्यक्ति को उलझनों में फँसाता जाता है। साधु को संतोषी बनाया गया है क्योंकि भोजनमात्र से उसे संतोष मिल जाता है। हमें भी साधु जैसा होना चाहिए। हमें अपनी इच्छाओं को सीमित रखना चाहिए जब इच्छाएँ हम पर हावी हो जाती हैं तो हमारा मन सदा असंतुष्ट रहता हैं। सांसारिक वस्तुएँ हमें कभी संतोष नहीं दे सकती। संतोष का संबंध मन से है। संतोष सबसे बड़ा धन है। इसके सम्मुख सोना-चाँदी, रुपया-पैसा व्यर्थ है।गद्यांश के अनुसार यदि व्यक्ति सुख से रहना चाहता है, तो उसे__________ होना होगा।
A.
कर्तव्यशील
B.
संतोषी
C.
धनाढ्य
D.
मितव्ययी
Correct Answer:
Option B - गंद्याश के अनुसार यदि व्यक्ति सुख से रहना चाहता हैं तो उसे संतोषी होना होगा। क्योंकि असंतोष मानसिक तनाव उत्पन्न करता है जो अनेक रोगों की जड़ हैं।
B. गंद्याश के अनुसार यदि व्यक्ति सुख से रहना चाहता हैं तो उसे संतोषी होना होगा। क्योंकि असंतोष मानसिक तनाव उत्पन्न करता है जो अनेक रोगों की जड़ हैं।
Explanations:
गंद्याश के अनुसार यदि व्यक्ति सुख से रहना चाहता हैं तो उसे संतोषी होना होगा। क्योंकि असंतोष मानसिक तनाव उत्पन्न करता है जो अनेक रोगों की जड़ हैं।
Download Our App
Download our app to know more Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipisicing elit.
Excepturi, esse.
YOU ARE NOT LOGIN
Unlocking possibilities: Login required for a world of personalized
experiences.