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Q: माघ को ‘‘घण्टापथ’’ की उपाधि से अलंकृत किया गया है
  • A. अच्छोद सरोवर के वर्णन के कारण
  • B. रैवतक पर्वत के वर्णन के कारण
  • C. नारद के वर्णन के कारण
  • D. इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - रैवतक पर्वत के वर्णन के कारण माघ को ‘‘घण्टापथ’’ की उपाधि से अलंकृत किया गया है। शिशुपालवध के चतुर्थ सर्ग के बीसवें श्लोक की सुन्दर कल्पना से मुग्ध होकर भावुक पण्डित इनको घण्टामाघ कहने लगे। रैवतक वर्णन के प्रसंग में कवि कहता है- उदयति विततोध्र्वरश्मिरज्जावहिमरुचौ हिमधाम्नि याति चास्तम् । वहति गिरिरयं विलम्बि घण्टाद्वयपरिवारितवारणेन्द्रलीलाम्।। इस श्लोक में रैवतक पर्वत की उपमा एक विशाल हाथी से दी गई है। जिसके आधार पर महाकवि माघ ने ‘घण्टामाघ’ की उपाधि पाई।
B. रैवतक पर्वत के वर्णन के कारण माघ को ‘‘घण्टापथ’’ की उपाधि से अलंकृत किया गया है। शिशुपालवध के चतुर्थ सर्ग के बीसवें श्लोक की सुन्दर कल्पना से मुग्ध होकर भावुक पण्डित इनको घण्टामाघ कहने लगे। रैवतक वर्णन के प्रसंग में कवि कहता है- उदयति विततोध्र्वरश्मिरज्जावहिमरुचौ हिमधाम्नि याति चास्तम् । वहति गिरिरयं विलम्बि घण्टाद्वयपरिवारितवारणेन्द्रलीलाम्।। इस श्लोक में रैवतक पर्वत की उपमा एक विशाल हाथी से दी गई है। जिसके आधार पर महाकवि माघ ने ‘घण्टामाघ’ की उपाधि पाई।

Explanations:

रैवतक पर्वत के वर्णन के कारण माघ को ‘‘घण्टापथ’’ की उपाधि से अलंकृत किया गया है। शिशुपालवध के चतुर्थ सर्ग के बीसवें श्लोक की सुन्दर कल्पना से मुग्ध होकर भावुक पण्डित इनको घण्टामाघ कहने लगे। रैवतक वर्णन के प्रसंग में कवि कहता है- उदयति विततोध्र्वरश्मिरज्जावहिमरुचौ हिमधाम्नि याति चास्तम् । वहति गिरिरयं विलम्बि घण्टाद्वयपरिवारितवारणेन्द्रलीलाम्।। इस श्लोक में रैवतक पर्वत की उपमा एक विशाल हाथी से दी गई है। जिसके आधार पर महाकवि माघ ने ‘घण्टामाघ’ की उपाधि पाई।