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Q: किस निर्णय ने संविधान की मूल संरचना का सिद्धान्त निर्धारित किया?
  • A. इंद्रा साहनी वाद
  • B. संकरी प्रसाद वाद
  • C. गोलकनाथ वाद
  • D. केशवानन्द भारती वाद
Correct Answer: Option D - 1973 में केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की 13 न्यायाधीशों की पीठ ने यह कहा कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, परन्तु उसके मूल ढाँचे में क्षति पहुचाएँ बिना। यदि कोई संविधान संशोधन किया जाता है और उसके मूल ढाँचे को क्षति पहुँचाता है तो इस संविधान संशोधन को न्यायालय द्वारा रद्द कर दिया जाएगा। संविधान संरचना के कुछ मूलभूत तत्वों में अनुच्छेद-368 के तहत संशोधन नही किया जा सकता है। जो निम्नलिखित है- - संविधान की सर्वोच्चता - शक्तियों का बँटवारा- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता आदि।
D. 1973 में केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की 13 न्यायाधीशों की पीठ ने यह कहा कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, परन्तु उसके मूल ढाँचे में क्षति पहुचाएँ बिना। यदि कोई संविधान संशोधन किया जाता है और उसके मूल ढाँचे को क्षति पहुँचाता है तो इस संविधान संशोधन को न्यायालय द्वारा रद्द कर दिया जाएगा। संविधान संरचना के कुछ मूलभूत तत्वों में अनुच्छेद-368 के तहत संशोधन नही किया जा सकता है। जो निम्नलिखित है- - संविधान की सर्वोच्चता - शक्तियों का बँटवारा- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता आदि।

Explanations:

1973 में केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की 13 न्यायाधीशों की पीठ ने यह कहा कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, परन्तु उसके मूल ढाँचे में क्षति पहुचाएँ बिना। यदि कोई संविधान संशोधन किया जाता है और उसके मूल ढाँचे को क्षति पहुँचाता है तो इस संविधान संशोधन को न्यायालय द्वारा रद्द कर दिया जाएगा। संविधान संरचना के कुछ मूलभूत तत्वों में अनुच्छेद-368 के तहत संशोधन नही किया जा सकता है। जो निम्नलिखित है- - संविधान की सर्वोच्चता - शक्तियों का बँटवारा- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता आदि।