Correct Answer:
Option B - ऑक्सी एसीटिलीन वेल्डिंग में नाइट्रोजन ज्वाला उपयोगी नहीं होता है। ऑक्सी–एसिटिलीन फ्लेम में-ऑक्सीजन तथा एसीटिलीन गैसो के मिश्रण को नियंत्रित करके निम्न तीन प्रकार की फ्लेम तैयार की जाती है–
(ग्i) न्यूट्रल फ्लेम (Neutral flame)–इसमें ऑक्सीजन तथा एसीटिलीन का अनुपात 1 : 1 होता है इसका तापक्रम 3100⁰ C होता है। इस फ्लेम के भीतरी कोन का रंग नीला होता है।
(ii) ऑक्सीडाइजिंग फ्लेम (Oxidising Flame)–इसमें एसीटिलीन की मात्रा आक्सीजन की अपेक्षा अधिक होती है इसका तापक्रम 3300⁰ C है।
(iii) कार्बुरीकारक ज्वाला (Carburizing flame)–इसमें एसीटिलीन की अपेक्षा ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है इसका तापमान 2900⁰ C होता है। इस फ्लेम के मध्य भाग का रंग सफेद होता है।
B. ऑक्सी एसीटिलीन वेल्डिंग में नाइट्रोजन ज्वाला उपयोगी नहीं होता है। ऑक्सी–एसिटिलीन फ्लेम में-ऑक्सीजन तथा एसीटिलीन गैसो के मिश्रण को नियंत्रित करके निम्न तीन प्रकार की फ्लेम तैयार की जाती है–
(ग्i) न्यूट्रल फ्लेम (Neutral flame)–इसमें ऑक्सीजन तथा एसीटिलीन का अनुपात 1 : 1 होता है इसका तापक्रम 3100⁰ C होता है। इस फ्लेम के भीतरी कोन का रंग नीला होता है।
(ii) ऑक्सीडाइजिंग फ्लेम (Oxidising Flame)–इसमें एसीटिलीन की मात्रा आक्सीजन की अपेक्षा अधिक होती है इसका तापक्रम 3300⁰ C है।
(iii) कार्बुरीकारक ज्वाला (Carburizing flame)–इसमें एसीटिलीन की अपेक्षा ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है इसका तापमान 2900⁰ C होता है। इस फ्लेम के मध्य भाग का रंग सफेद होता है।