Correct Answer:
Option D - ‘कृषक -क्रन्दन’ गया प्रसाद शुक्ल सनेही की रचना है। इनकी अन्य रचनाएँ – पे्रम पचीसी, राष्ट्रीय वीणा, त्रिशूल तरंग, करुणा तथा कादम्बिनी है।
रंग में भंग, जयद्रथ वध, किसान, विकट भट, गुरुकुल, साकेत, भारत-भारती, झंकार, यशोधरा, द्वापर, जय भारत, विष्णु प्रिया, हिडिम्बा सिद्धराज, हिन्दू, वैतालिक तथा पंचवटी आदि मैथिलीशरण गुप्त के काव्य ग्रंथ है।
D. ‘कृषक -क्रन्दन’ गया प्रसाद शुक्ल सनेही की रचना है। इनकी अन्य रचनाएँ – पे्रम पचीसी, राष्ट्रीय वीणा, त्रिशूल तरंग, करुणा तथा कादम्बिनी है।
रंग में भंग, जयद्रथ वध, किसान, विकट भट, गुरुकुल, साकेत, भारत-भारती, झंकार, यशोधरा, द्वापर, जय भारत, विष्णु प्रिया, हिडिम्बा सिद्धराज, हिन्दू, वैतालिक तथा पंचवटी आदि मैथिलीशरण गुप्त के काव्य ग्रंथ है।