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Q: ``मुर्ध्नि वा सर्वलोकस्य शीर्यते वन एव वा' श्लोकांश में `मुर्ध्नि' का अर्थ है :
  • A. आगे
  • B. पीछे
  • C. नीचे
  • D. ऊपर
Correct Answer: Option D - प्रस्तुत पंक्ति नीतिशतक से ली गई है जिसका आशय है जैसे फूल के गुच्छे या तो सिर पर चढ़ते हैं या वन में मुरझाकर बिखर जाते हैं। वैसे ही मनस्वी पुरुष की दो गतियाँ होती हैं या तो वे समाज में सर्वोन्नत स्थान प्राप्त करते हैं या समाज से दूर रहकर वन में अपना जीवन बिताते हैं।
D. प्रस्तुत पंक्ति नीतिशतक से ली गई है जिसका आशय है जैसे फूल के गुच्छे या तो सिर पर चढ़ते हैं या वन में मुरझाकर बिखर जाते हैं। वैसे ही मनस्वी पुरुष की दो गतियाँ होती हैं या तो वे समाज में सर्वोन्नत स्थान प्राप्त करते हैं या समाज से दूर रहकर वन में अपना जीवन बिताते हैं।

Explanations:

प्रस्तुत पंक्ति नीतिशतक से ली गई है जिसका आशय है जैसे फूल के गुच्छे या तो सिर पर चढ़ते हैं या वन में मुरझाकर बिखर जाते हैं। वैसे ही मनस्वी पुरुष की दो गतियाँ होती हैं या तो वे समाज में सर्वोन्नत स्थान प्राप्त करते हैं या समाज से दूर रहकर वन में अपना जीवन बिताते हैं।