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Q: ‘‘लोग हैं लागि कवित्त बनावत, मोहि तौ मेरे कवित्त बनावत।’’ यह काव्य पंक्ति किस कवि द्वारा रचित है?
  • A. केशवदास
  • B. मतिराम
  • C. नंददास
  • D. घनानंद
Correct Answer: Option D - ‘‘लोग हैं लागि कवित्त बनावत, मोहि तौ मेरे कवित्त बनावत।’’ यह काव्य पंक्ति कवि घनानन्द द्वारा रचित है। शेष इस प्रकार हैं– पंक्ति लेखक भाषा बोलि न जानहि जिनके कुल के दास। भाषा कवि को मंदमति तेहि कुल केशवदास।। –केशवदास नृपति नैन कमलनि वृथा, चितवत बासर जाहि। हृदय कमल में हरि लै, कमलमुखी कमलाहि।। –मतिराम ताही छिन उड्डराज उदित रस-रास सहायक। मंडित-बदन प्रिया जनु नागरि-नायक।। –नंददास
D. ‘‘लोग हैं लागि कवित्त बनावत, मोहि तौ मेरे कवित्त बनावत।’’ यह काव्य पंक्ति कवि घनानन्द द्वारा रचित है। शेष इस प्रकार हैं– पंक्ति लेखक भाषा बोलि न जानहि जिनके कुल के दास। भाषा कवि को मंदमति तेहि कुल केशवदास।। –केशवदास नृपति नैन कमलनि वृथा, चितवत बासर जाहि। हृदय कमल में हरि लै, कमलमुखी कमलाहि।। –मतिराम ताही छिन उड्डराज उदित रस-रास सहायक। मंडित-बदन प्रिया जनु नागरि-नायक।। –नंददास

Explanations:

‘‘लोग हैं लागि कवित्त बनावत, मोहि तौ मेरे कवित्त बनावत।’’ यह काव्य पंक्ति कवि घनानन्द द्वारा रचित है। शेष इस प्रकार हैं– पंक्ति लेखक भाषा बोलि न जानहि जिनके कुल के दास। भाषा कवि को मंदमति तेहि कुल केशवदास।। –केशवदास नृपति नैन कमलनि वृथा, चितवत बासर जाहि। हृदय कमल में हरि लै, कमलमुखी कमलाहि।। –मतिराम ताही छिन उड्डराज उदित रस-रास सहायक। मंडित-बदन प्रिया जनु नागरि-नायक।। –नंददास