Correct Answer:
Option C - ‘ब्रह्मर्षि’ का सही संधि-विच्छेद ‘ब्रह्म+ऋषि’ होता है। स्वर संधि- यदि अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, और ऋ के बाद वे ही ह्रस्व या दीर्घ स्वर आएँ तो दोनों मिलकर क्रमश: आ, ई, ऊ और ऋ हो जाते हैं। जैसे- पितृ + ऋण = पितृण, गिरि + ईश = गिरीश
C. ‘ब्रह्मर्षि’ का सही संधि-विच्छेद ‘ब्रह्म+ऋषि’ होता है। स्वर संधि- यदि अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, और ऋ के बाद वे ही ह्रस्व या दीर्घ स्वर आएँ तो दोनों मिलकर क्रमश: आ, ई, ऊ और ऋ हो जाते हैं। जैसे- पितृ + ऋण = पितृण, गिरि + ईश = गिरीश