Correct Answer:
Option D - सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने ‘कुट्टिचातन’ नाम से भी कुछ निबंध लिखे हैं। विश्वनाथ तिवारी अज्ञेय को ‘चिंतक रचनाकार मानते हैं तो कृष्ण बलदेव वैद ‘‘खूबसूरत नकाबपोश’’ मानते हैं। उनके अन्य उपनाम है – श्री वत्स, गजानन पंडित, डॉ. अबुल लतीफ, समाजद्रोही नं. 1।
अज्ञेय के निबन्ध संग्रह– त्रिशंकु (1945), सब रंग और कुछ राग (1969 ई.), आत्मनेपद (1960), आलवाल (1971), लिखी कागद कोरे (1972), अद्यतन (1977), जोग लिखी (1977), स्त्रोत और सेतु (1978), युग संधियों पर (1981), धार और किनारे (1982), कहाँ है द्वारका (1982), केन्द्र और परिधि (1984)।
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबन्ध संग्रह– अशोक के फूल (1948), मध्यकालीन धर्म साधना (1952), विचार और वितर्क (1957), विचार प्रवाह (1959), कुटज (1964), साहित्य सहचर (1965), आलोक पर्व (1972), कल्पलता (1951)।
जैनेन्द्र के निबन्ध संग्रह– प्रस्तुत प्रश्न (1936), जड़ की बात (1945), पूर्वोदय (1951), साहित्य का श्रेय और प्रेय (1953), मंथन (1953), सोच विचार (1953), काम प्रेम और परिवार (1953), इतस्तत: (1963), समय और हम (1964), परिप्रेक्ष्य (1977)।
D. सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने ‘कुट्टिचातन’ नाम से भी कुछ निबंध लिखे हैं। विश्वनाथ तिवारी अज्ञेय को ‘चिंतक रचनाकार मानते हैं तो कृष्ण बलदेव वैद ‘‘खूबसूरत नकाबपोश’’ मानते हैं। उनके अन्य उपनाम है – श्री वत्स, गजानन पंडित, डॉ. अबुल लतीफ, समाजद्रोही नं. 1।
अज्ञेय के निबन्ध संग्रह– त्रिशंकु (1945), सब रंग और कुछ राग (1969 ई.), आत्मनेपद (1960), आलवाल (1971), लिखी कागद कोरे (1972), अद्यतन (1977), जोग लिखी (1977), स्त्रोत और सेतु (1978), युग संधियों पर (1981), धार और किनारे (1982), कहाँ है द्वारका (1982), केन्द्र और परिधि (1984)।
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबन्ध संग्रह– अशोक के फूल (1948), मध्यकालीन धर्म साधना (1952), विचार और वितर्क (1957), विचार प्रवाह (1959), कुटज (1964), साहित्य सहचर (1965), आलोक पर्व (1972), कल्पलता (1951)।
जैनेन्द्र के निबन्ध संग्रह– प्रस्तुत प्रश्न (1936), जड़ की बात (1945), पूर्वोदय (1951), साहित्य का श्रेय और प्रेय (1953), मंथन (1953), सोच विचार (1953), काम प्रेम और परिवार (1953), इतस्तत: (1963), समय और हम (1964), परिप्रेक्ष्य (1977)।