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Q: ‘कृषक – क्रन्दन’ इनमें से किसकी काव्यकृति है?
  • A. रामनरेश त्रिपाठी
  • B. रामकुमार वर्मा
  • C. गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
  • D. मैथिलीशरण गुप्त
Correct Answer: Option C - ‘कृषक-क्रन्दन’ गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ की काव्यकृति है। गया प्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ की अन्य काव्य कृतियाँ– प्रेम पचीसी (लगभग 1905 ई.), कुसुमांजलि (1915 ई.), कृषक क्रन्दन (1916), राष्ट्रीय वीणा, त्रिशूल तरंग (1919 ई.), करुणा कादम्बिनी (1958)। रामनरेश त्रिपाठी की काव्य कृतियाँ– मिलन (1917), पथिक (1920), मानसी (1927), स्वप्न (1929) मैथिलीशरण गुप्त की काव्य कृतियाँ– रंग में भंग (1909), जयद्रथ वध (1910), भारत-भारती (1912), किसान (1917), विकट भट (1929), साकेत (1931), यशोधरा (1932), द्वापर (1936), जयभारत (1952), विष्णुप्रिया (1957)।
C. ‘कृषक-क्रन्दन’ गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ की काव्यकृति है। गया प्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ की अन्य काव्य कृतियाँ– प्रेम पचीसी (लगभग 1905 ई.), कुसुमांजलि (1915 ई.), कृषक क्रन्दन (1916), राष्ट्रीय वीणा, त्रिशूल तरंग (1919 ई.), करुणा कादम्बिनी (1958)। रामनरेश त्रिपाठी की काव्य कृतियाँ– मिलन (1917), पथिक (1920), मानसी (1927), स्वप्न (1929) मैथिलीशरण गुप्त की काव्य कृतियाँ– रंग में भंग (1909), जयद्रथ वध (1910), भारत-भारती (1912), किसान (1917), विकट भट (1929), साकेत (1931), यशोधरा (1932), द्वापर (1936), जयभारत (1952), विष्णुप्रिया (1957)।

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‘कृषक-क्रन्दन’ गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ की काव्यकृति है। गया प्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ की अन्य काव्य कृतियाँ– प्रेम पचीसी (लगभग 1905 ई.), कुसुमांजलि (1915 ई.), कृषक क्रन्दन (1916), राष्ट्रीय वीणा, त्रिशूल तरंग (1919 ई.), करुणा कादम्बिनी (1958)। रामनरेश त्रिपाठी की काव्य कृतियाँ– मिलन (1917), पथिक (1920), मानसी (1927), स्वप्न (1929) मैथिलीशरण गुप्त की काव्य कृतियाँ– रंग में भंग (1909), जयद्रथ वध (1910), भारत-भारती (1912), किसान (1917), विकट भट (1929), साकेत (1931), यशोधरा (1932), द्वापर (1936), जयभारत (1952), विष्णुप्रिया (1957)।