Correct Answer:
Option B - माता प्रसाद जी ने अपनी आत्मकथा ‘झोपड़ी से राजभवन’ नाम से लिखी। 1993 ई. से 1999 ई. तक माता प्रसाद जी अरूणाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रहे। भारत में दलित जागरण और उसके अग्रदूत भी रहे। इनकी आत्मकथा में अभाव और उत्पीड़न के शिकार दलित समाज की पीड़ा, दर्द, संघर्ष, स्वाभिमान और जिजीविषा की कहानी भी नजर आती है।
जबकि अन्य दलित रचनाकारों की आत्मकथाएँ निम्न हैं-
श्योराज सिंह बेचैन - (1) मेरा बचपन मेरे कन्धों पर
(2) बे वक्त गुजर गया माली
तुलसीराम - (1) मुर्दहिया
(2) मणिकर्णिका
ओम प्रकाश वाल्मीकि - जूठन
सुशीला टाकभौरे - शिकंजे का दर्द
B. माता प्रसाद जी ने अपनी आत्मकथा ‘झोपड़ी से राजभवन’ नाम से लिखी। 1993 ई. से 1999 ई. तक माता प्रसाद जी अरूणाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रहे। भारत में दलित जागरण और उसके अग्रदूत भी रहे। इनकी आत्मकथा में अभाव और उत्पीड़न के शिकार दलित समाज की पीड़ा, दर्द, संघर्ष, स्वाभिमान और जिजीविषा की कहानी भी नजर आती है।
जबकि अन्य दलित रचनाकारों की आत्मकथाएँ निम्न हैं-
श्योराज सिंह बेचैन - (1) मेरा बचपन मेरे कन्धों पर
(2) बे वक्त गुजर गया माली
तुलसीराम - (1) मुर्दहिया
(2) मणिकर्णिका
ओम प्रकाश वाल्मीकि - जूठन
सुशीला टाकभौरे - शिकंजे का दर्द