Correct Answer:
Option C - • दिवालियापन (Bankruptcy) अथवा शोधन अक्षमता से तात्पर्य उस वित्त से है जिसमें कोई व्यक्ति या संस्था बकाया होने पर अपने ऋणों का भुगतान करने में असमर्थ होता है। जिसके लिए सक्षम न्यायालय द्वारा इसे हल करने और लेनदारों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए उस व्यक्ति या संस्था को दिवालिया घोषित कर दिया जाता है। यह ऋणों का भुगतान करने में असमर्थता की कानूनी घोषणा होती है।
• दिवालियापन एक कानूनी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से जो लोग या संस्थाएं लेनदारों को ऋण नहीं चुका सकते वे अपने कुछ या सभी ऋणों से राहत मांग सकते है।
• दिवाला (Insolvency) से तात्पर्य संकट की वित्तीय स्थिति से है जिसमें ऋण भुगतान व वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए नकदी की कमी होती है।
• दिवाला (Insolvency) एक अवस्था है, जबकि दिवालियापन (Bankruptcy) एक निष्कर्ष है।
• भारतीय दिवाला और शोध अक्षमता बोर्ड (IBBI) दिवाला और शोध अक्षमता कार्यवाही की देखरेख के लिए जिम्मेदार नियामक निकाय है।
C. • दिवालियापन (Bankruptcy) अथवा शोधन अक्षमता से तात्पर्य उस वित्त से है जिसमें कोई व्यक्ति या संस्था बकाया होने पर अपने ऋणों का भुगतान करने में असमर्थ होता है। जिसके लिए सक्षम न्यायालय द्वारा इसे हल करने और लेनदारों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए उस व्यक्ति या संस्था को दिवालिया घोषित कर दिया जाता है। यह ऋणों का भुगतान करने में असमर्थता की कानूनी घोषणा होती है।
• दिवालियापन एक कानूनी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से जो लोग या संस्थाएं लेनदारों को ऋण नहीं चुका सकते वे अपने कुछ या सभी ऋणों से राहत मांग सकते है।
• दिवाला (Insolvency) से तात्पर्य संकट की वित्तीय स्थिति से है जिसमें ऋण भुगतान व वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए नकदी की कमी होती है।
• दिवाला (Insolvency) एक अवस्था है, जबकि दिवालियापन (Bankruptcy) एक निष्कर्ष है।
• भारतीय दिवाला और शोध अक्षमता बोर्ड (IBBI) दिवाला और शोध अक्षमता कार्यवाही की देखरेख के लिए जिम्मेदार नियामक निकाय है।