search
Q: ............... चिकनकारी कला का उद्भव केंद्र है।
  • A. दिल्ली
  • B. बंबई
  • C. गोवा
  • D. लखनऊ
Correct Answer: Option D - उत्तर प्रदेश में लखनऊ (Lucknow) चिकनकारी (Chikankari) कढ़ाई के लिए सदा से ही प्रसिद्ध रहा है यहाँ के चिकनकारी वस्त्र विश्व भर में प्रसिद्ध है। चिकनकारी कढ़ाई में शैडो काम (shadow work) किया जाता है। चिकनकारी कढ़ाई अत्यन्त सूक्ष्म, बारीक एवं कोमल होती है। पहले यह केवल श्वेत मलमल के वस्त्र पर श्वेत रेशमी धागों से ही बनायी जाती थी। परन्तु आजकल यह कढ़ाई अन्य वस्त्रों पर भी जैसे 2x2 औरगैन्डी, सिफॉन, जौरजेट नेट वायल आदि पर भी बनायी जाती है।
D. उत्तर प्रदेश में लखनऊ (Lucknow) चिकनकारी (Chikankari) कढ़ाई के लिए सदा से ही प्रसिद्ध रहा है यहाँ के चिकनकारी वस्त्र विश्व भर में प्रसिद्ध है। चिकनकारी कढ़ाई में शैडो काम (shadow work) किया जाता है। चिकनकारी कढ़ाई अत्यन्त सूक्ष्म, बारीक एवं कोमल होती है। पहले यह केवल श्वेत मलमल के वस्त्र पर श्वेत रेशमी धागों से ही बनायी जाती थी। परन्तु आजकल यह कढ़ाई अन्य वस्त्रों पर भी जैसे 2x2 औरगैन्डी, सिफॉन, जौरजेट नेट वायल आदि पर भी बनायी जाती है।

Explanations:

उत्तर प्रदेश में लखनऊ (Lucknow) चिकनकारी (Chikankari) कढ़ाई के लिए सदा से ही प्रसिद्ध रहा है यहाँ के चिकनकारी वस्त्र विश्व भर में प्रसिद्ध है। चिकनकारी कढ़ाई में शैडो काम (shadow work) किया जाता है। चिकनकारी कढ़ाई अत्यन्त सूक्ष्म, बारीक एवं कोमल होती है। पहले यह केवल श्वेत मलमल के वस्त्र पर श्वेत रेशमी धागों से ही बनायी जाती थी। परन्तु आजकल यह कढ़ाई अन्य वस्त्रों पर भी जैसे 2x2 औरगैन्डी, सिफॉन, जौरजेट नेट वायल आदि पर भी बनायी जाती है।