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Q: भीतर-भीतर सब रस चूसै हंसि-हंसि के तन मन धन मूसै- पंक्ति किस कवि की है?
  • A. प्रतापनारायण मिश्र
  • B. बालकृष्णभट्ट
  • C. ठाकुर
  • D. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
Correct Answer: Option D - उपर्युक्त पंक्ति भरतेन्दु हरिश्चन्द्र का है। हिन्दी साहित्य के संदर्भ में नवजागरण के अग्रदूत, ‘निजभाषा उन्नति अहै सब उन्नति कौ मूल’ को बीज मंत्र मानने वाले, बल्लभ सम्प्रदाय में दीक्षित, उर्दू में रसा उपनाम से कविता करने वाले भारतेन्दु हरिश्चन्द्र सत्तर काव्य ग्रंथो की रचना की है। इसके प्रमुख कव्य ग्रंथ हैे- विजयनी विजय वैयजन्ती, दशरथ विलाप, फूलो का गुच्छा, भारत भिक्षा, रिपुनाष्टक, प्रबोधिनी, प्रातसमीरन इत्यादि।
D. उपर्युक्त पंक्ति भरतेन्दु हरिश्चन्द्र का है। हिन्दी साहित्य के संदर्भ में नवजागरण के अग्रदूत, ‘निजभाषा उन्नति अहै सब उन्नति कौ मूल’ को बीज मंत्र मानने वाले, बल्लभ सम्प्रदाय में दीक्षित, उर्दू में रसा उपनाम से कविता करने वाले भारतेन्दु हरिश्चन्द्र सत्तर काव्य ग्रंथो की रचना की है। इसके प्रमुख कव्य ग्रंथ हैे- विजयनी विजय वैयजन्ती, दशरथ विलाप, फूलो का गुच्छा, भारत भिक्षा, रिपुनाष्टक, प्रबोधिनी, प्रातसमीरन इत्यादि।

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उपर्युक्त पंक्ति भरतेन्दु हरिश्चन्द्र का है। हिन्दी साहित्य के संदर्भ में नवजागरण के अग्रदूत, ‘निजभाषा उन्नति अहै सब उन्नति कौ मूल’ को बीज मंत्र मानने वाले, बल्लभ सम्प्रदाय में दीक्षित, उर्दू में रसा उपनाम से कविता करने वाले भारतेन्दु हरिश्चन्द्र सत्तर काव्य ग्रंथो की रचना की है। इसके प्रमुख कव्य ग्रंथ हैे- विजयनी विजय वैयजन्ती, दशरथ विलाप, फूलो का गुच्छा, भारत भिक्षा, रिपुनाष्टक, प्रबोधिनी, प्रातसमीरन इत्यादि।