Correct Answer:
Option A - खाद्य शृंखला में क्रमिक उच्च पोषण स्तरों में प्रजातियों की संख्या, सकल बायोमास तथा ऊर्जा की सुलभता एवं प्राप्यता में इस तरह से ह्रास होता है कि उनका आकार पिरामिड जैसा हो जाता है, जिसे पारिस्थितिकीय पिरामिड कहते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं- संख्या पिरामिड, बायोमास पिरामिड एवं ऊर्जा पिरामिड। जलीय/समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में बायोमास का पिरामिड उल्टा होता है, क्योंकि जलीय पारितंत्र के उत्पादक सूक्ष्म पादपप्लवक होते हैें जो तीव्र गति से वृद्धि करते हुए जनन करते हैं इससे बायोमास के पिरामिड का आधार छोटा होता है और किसी भी समय उपभोक्ता का बायोमास प्राथमिक उत्पादक के बायोमास से अधिक होगा। ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा होता है।
A. खाद्य शृंखला में क्रमिक उच्च पोषण स्तरों में प्रजातियों की संख्या, सकल बायोमास तथा ऊर्जा की सुलभता एवं प्राप्यता में इस तरह से ह्रास होता है कि उनका आकार पिरामिड जैसा हो जाता है, जिसे पारिस्थितिकीय पिरामिड कहते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं- संख्या पिरामिड, बायोमास पिरामिड एवं ऊर्जा पिरामिड। जलीय/समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में बायोमास का पिरामिड उल्टा होता है, क्योंकि जलीय पारितंत्र के उत्पादक सूक्ष्म पादपप्लवक होते हैें जो तीव्र गति से वृद्धि करते हुए जनन करते हैं इससे बायोमास के पिरामिड का आधार छोटा होता है और किसी भी समय उपभोक्ता का बायोमास प्राथमिक उत्पादक के बायोमास से अधिक होगा। ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा होता है।