Correct Answer:
Option D - ‘‘आइन-ए-अकबरी’ अबुल फजल द्वारा लिखी गई थी, ‘आइन-ए-अकबरी’, अकबर नामा का तीसरा भाग है जिसके पाँच भाग है-
प्रथम भाग - राजकोष, रत्नायर, शास्त्रागार, टकशाल, मुद्रा, वस्तुओं के मूल्य, बादशाह की दिनचर्या, दरबार के शिष्टाचार, दीन-ए-इलाही के नियम आदि का उल्लेख है।
द्वितीय भाग- इसके अन्तर्गत राजकीय कर्मचारी, सेना का भाग, वेतन प्रणाली, आखेट, मनोरंजन आदि।
तृतीय भाग- इस भाग में भूमि सुधार, राजस्व व्यवस्था, न्याय व्यवस्था व नए संवत् के प्रचलन पर प्रकाश डाला गया है।
चतुर्थ भाग- इस भाग में हिन्दू मुस्लिम दर्शन एवं सम्प्रदायों, विदेशी यात्रियों तथा कुछ सन्तों एवं विदेशियों का उल्लेख हैं
पाँचवे भाग - इस भाग में अकबर की कहावतें एवं अबुल फजल की आत्मकथा है।
D. ‘‘आइन-ए-अकबरी’ अबुल फजल द्वारा लिखी गई थी, ‘आइन-ए-अकबरी’, अकबर नामा का तीसरा भाग है जिसके पाँच भाग है-
प्रथम भाग - राजकोष, रत्नायर, शास्त्रागार, टकशाल, मुद्रा, वस्तुओं के मूल्य, बादशाह की दिनचर्या, दरबार के शिष्टाचार, दीन-ए-इलाही के नियम आदि का उल्लेख है।
द्वितीय भाग- इसके अन्तर्गत राजकीय कर्मचारी, सेना का भाग, वेतन प्रणाली, आखेट, मनोरंजन आदि।
तृतीय भाग- इस भाग में भूमि सुधार, राजस्व व्यवस्था, न्याय व्यवस्था व नए संवत् के प्रचलन पर प्रकाश डाला गया है।
चतुर्थ भाग- इस भाग में हिन्दू मुस्लिम दर्शन एवं सम्प्रदायों, विदेशी यात्रियों तथा कुछ सन्तों एवं विदेशियों का उल्लेख हैं
पाँचवे भाग - इस भाग में अकबर की कहावतें एवं अबुल फजल की आत्मकथा है।