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Q: आदिकाल में पहेलियाँ लिखने वाले कवि थे -
  • A. जगनिक
  • B. खुसरो
  • C. सरहपा
  • D. गोरखनाथ
Correct Answer: Option B - आदिकाल में पहेलियाँ लिखने वाले कवि अमीर खुसरो थे। इनका वास्तविक नाम अबुल हसन था तथा ये निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे। अमीर खुसरो खड़ी बोली के आदि (प्रथम) कवि माने जाते हैं। अमीर खुसरो द्वारा रचित ग्रंथ- खालिक बारी, पहेलियाँ, मुकरियाँ, दो सुखने तथा गजल आदि हैं। सरहपा आदिकाल के कवि हैं तथा इन्हें हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है। इन्हें सरोज वङ्का, राहुल भद्र आदि नामों से जाना जाता है। ‘दोहाकोश’ सरहपा का प्रसिद्ध ग्रंथ है। आदिकाल के कवि गोरखनाथ को नाथ साहित्य का आरम्भकर्ता माना जाता है। गोरखनाथ ने षट्चक्रों वाला योग-मार्ग का प्रारम्भ किया। जगनिक आदि काल के रासो साहित्य परम्परा के कवि हैं। जगनिक परमालरासो नामक वीररस युक्त ग्रंथ की रचना की जिसे आल्हाखण्ड के नाम से भी जाना जाता है।
B. आदिकाल में पहेलियाँ लिखने वाले कवि अमीर खुसरो थे। इनका वास्तविक नाम अबुल हसन था तथा ये निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे। अमीर खुसरो खड़ी बोली के आदि (प्रथम) कवि माने जाते हैं। अमीर खुसरो द्वारा रचित ग्रंथ- खालिक बारी, पहेलियाँ, मुकरियाँ, दो सुखने तथा गजल आदि हैं। सरहपा आदिकाल के कवि हैं तथा इन्हें हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है। इन्हें सरोज वङ्का, राहुल भद्र आदि नामों से जाना जाता है। ‘दोहाकोश’ सरहपा का प्रसिद्ध ग्रंथ है। आदिकाल के कवि गोरखनाथ को नाथ साहित्य का आरम्भकर्ता माना जाता है। गोरखनाथ ने षट्चक्रों वाला योग-मार्ग का प्रारम्भ किया। जगनिक आदि काल के रासो साहित्य परम्परा के कवि हैं। जगनिक परमालरासो नामक वीररस युक्त ग्रंथ की रचना की जिसे आल्हाखण्ड के नाम से भी जाना जाता है।

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आदिकाल में पहेलियाँ लिखने वाले कवि अमीर खुसरो थे। इनका वास्तविक नाम अबुल हसन था तथा ये निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे। अमीर खुसरो खड़ी बोली के आदि (प्रथम) कवि माने जाते हैं। अमीर खुसरो द्वारा रचित ग्रंथ- खालिक बारी, पहेलियाँ, मुकरियाँ, दो सुखने तथा गजल आदि हैं। सरहपा आदिकाल के कवि हैं तथा इन्हें हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है। इन्हें सरोज वङ्का, राहुल भद्र आदि नामों से जाना जाता है। ‘दोहाकोश’ सरहपा का प्रसिद्ध ग्रंथ है। आदिकाल के कवि गोरखनाथ को नाथ साहित्य का आरम्भकर्ता माना जाता है। गोरखनाथ ने षट्चक्रों वाला योग-मार्ग का प्रारम्भ किया। जगनिक आदि काल के रासो साहित्य परम्परा के कवि हैं। जगनिक परमालरासो नामक वीररस युक्त ग्रंथ की रचना की जिसे आल्हाखण्ड के नाम से भी जाना जाता है।