Correct Answer:
Option D - ‘तीसरी कसम’ कहानी से उद्धृत इन पक्तियों का पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित रूप इस प्रकार है-
● चलो भैयन, जान बचेगी तो ऐसी-ऐसी सग्गड़ गाड़ी बहुत मिलेगी,
● और इस बार जनानी सवारी, औरत है या चंपा का फूल! जब से गाड़ी मह-मह महक रहा है,
● इस्स! हिरामन को परतीत नहीं, मर्द और औरत के नाम में फर्क होता है,
● तुम मेरे उस्ताद हो, हमारे शास्तर में लिखा हुआ है, एक अच्छर सिखानेवाला भी गुरु और एक राग सिखानेवाला भी उस्ताद,
● इस्स! हरदम रुपैया पैसा! रखिये रुपैया! क्या करेंगे चादर? ‘तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम’ फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ द्वारा रचित कहानी है। इस कहानी में प्रेम, त्याग और ग्रामीण जीवन का यथार्थ चित्रण है। इसमें ‘हीरामन’ नामक एक बैलगाड़ी चालक तथा हीरबाई नामक एक नौटंकी कलाकार के बीच पनपने वाले एकतरफा प्रेम और त्याग की कहानी है। ठुमरी (1959 ई.), आदिम रात्रि की महक (1967 ई.), अग्निखोर 1973 ई.), एक श्रावणी दोपहर की धूप (1984 ई.), अच्छे आदमी (1986 ई.) रेणु जी के प्रमुख कहानी संग्रह हैं।
D. ‘तीसरी कसम’ कहानी से उद्धृत इन पक्तियों का पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित रूप इस प्रकार है-
● चलो भैयन, जान बचेगी तो ऐसी-ऐसी सग्गड़ गाड़ी बहुत मिलेगी,
● और इस बार जनानी सवारी, औरत है या चंपा का फूल! जब से गाड़ी मह-मह महक रहा है,
● इस्स! हिरामन को परतीत नहीं, मर्द और औरत के नाम में फर्क होता है,
● तुम मेरे उस्ताद हो, हमारे शास्तर में लिखा हुआ है, एक अच्छर सिखानेवाला भी गुरु और एक राग सिखानेवाला भी उस्ताद,
● इस्स! हरदम रुपैया पैसा! रखिये रुपैया! क्या करेंगे चादर? ‘तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम’ फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ द्वारा रचित कहानी है। इस कहानी में प्रेम, त्याग और ग्रामीण जीवन का यथार्थ चित्रण है। इसमें ‘हीरामन’ नामक एक बैलगाड़ी चालक तथा हीरबाई नामक एक नौटंकी कलाकार के बीच पनपने वाले एकतरफा प्रेम और त्याग की कहानी है। ठुमरी (1959 ई.), आदिम रात्रि की महक (1967 ई.), अग्निखोर 1973 ई.), एक श्रावणी दोपहर की धूप (1984 ई.), अच्छे आदमी (1986 ई.) रेणु जी के प्रमुख कहानी संग्रह हैं।