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Q: ,
  • A. शाहजहाँ
  • B. अकबर
  • C. औरंगजेब
  • D. जहाँगीर
Correct Answer: Option D - सर्वप्रथम 1608 ई. में कैप्टन विलियम हॉकिन्स इंग्लैण्ड के राजा जेम्स I के दूत के रूप में सम्राट अकबर के नाम पत्र लेकर बादशाह जहाँगीर के दरबार में उपस्थित हुआ। हॉकिन्स तुर्की और फारसी भाषा बोल सकता था। जहाँगीर उससे बहुत प्रभावित हुआ। उसने हॉकिन्स को 400 का मनसब तथा फिरंगी खाँ और इंग्लिश खान की उपाधि से सम्मानित किया। हॉकिन्स के बाद 1615 ई. में सर थॉमस रो जहाँगीर के ही काल में भारत आया था। सर थॉमस रो ने जहाँगीर के दरबार का सजीव वर्णन किया है। मुगल शासक जहाँगीर न्याय हेतु एक जंजीर एवं घंटी लटकाई थी जिसे जंजीर-ए-आदिल कहा जाता था। पिट्रा ड्यूरा दीवारों में कीमती पत्थर व नक्काशी करने की एक कला थी जिसकी शुरूआत जहाँगीर के काल में हुई थी।
D. सर्वप्रथम 1608 ई. में कैप्टन विलियम हॉकिन्स इंग्लैण्ड के राजा जेम्स I के दूत के रूप में सम्राट अकबर के नाम पत्र लेकर बादशाह जहाँगीर के दरबार में उपस्थित हुआ। हॉकिन्स तुर्की और फारसी भाषा बोल सकता था। जहाँगीर उससे बहुत प्रभावित हुआ। उसने हॉकिन्स को 400 का मनसब तथा फिरंगी खाँ और इंग्लिश खान की उपाधि से सम्मानित किया। हॉकिन्स के बाद 1615 ई. में सर थॉमस रो जहाँगीर के ही काल में भारत आया था। सर थॉमस रो ने जहाँगीर के दरबार का सजीव वर्णन किया है। मुगल शासक जहाँगीर न्याय हेतु एक जंजीर एवं घंटी लटकाई थी जिसे जंजीर-ए-आदिल कहा जाता था। पिट्रा ड्यूरा दीवारों में कीमती पत्थर व नक्काशी करने की एक कला थी जिसकी शुरूआत जहाँगीर के काल में हुई थी।

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सर्वप्रथम 1608 ई. में कैप्टन विलियम हॉकिन्स इंग्लैण्ड के राजा जेम्स I के दूत के रूप में सम्राट अकबर के नाम पत्र लेकर बादशाह जहाँगीर के दरबार में उपस्थित हुआ। हॉकिन्स तुर्की और फारसी भाषा बोल सकता था। जहाँगीर उससे बहुत प्रभावित हुआ। उसने हॉकिन्स को 400 का मनसब तथा फिरंगी खाँ और इंग्लिश खान की उपाधि से सम्मानित किया। हॉकिन्स के बाद 1615 ई. में सर थॉमस रो जहाँगीर के ही काल में भारत आया था। सर थॉमस रो ने जहाँगीर के दरबार का सजीव वर्णन किया है। मुगल शासक जहाँगीर न्याय हेतु एक जंजीर एवं घंटी लटकाई थी जिसे जंजीर-ए-आदिल कहा जाता था। पिट्रा ड्यूरा दीवारों में कीमती पत्थर व नक्काशी करने की एक कला थी जिसकी शुरूआत जहाँगीर के काल में हुई थी।