Correct Answer:
Option B - श्रीकेशवमिश्रस्य मते साक्षात्कारिणी प्रमा इन्द्रियजा। अर्थात् श्रीकेशवमिश्र के मत में साक्षात्कारिणी प्रमा ‘इन्द्रियजा’ है साक्षात्कार करने वाली प्रमा का करण प्रत्यक्ष कहलाता है। (साक्षात्कारि प्रमाकरणं प्रत्यक्षम्) और साक्षात्कार करने वाली प्रमा वह है जो इन्द्रिय से उत्पन्न होती है। सविकल्पक तथा निर्विकल्पक भेद से वह दो प्रकार की होती है। इसका करण तीन प्रकार का होता है– (1) इन्द्रिय (2) इन्द्रियार्थसन्निकर्ष (3) ज्ञान।
Note- न्यायवैशेषिक चार प्रमाण तथा वैशेषिक दो प्रमाण मानता है।
B. श्रीकेशवमिश्रस्य मते साक्षात्कारिणी प्रमा इन्द्रियजा। अर्थात् श्रीकेशवमिश्र के मत में साक्षात्कारिणी प्रमा ‘इन्द्रियजा’ है साक्षात्कार करने वाली प्रमा का करण प्रत्यक्ष कहलाता है। (साक्षात्कारि प्रमाकरणं प्रत्यक्षम्) और साक्षात्कार करने वाली प्रमा वह है जो इन्द्रिय से उत्पन्न होती है। सविकल्पक तथा निर्विकल्पक भेद से वह दो प्रकार की होती है। इसका करण तीन प्रकार का होता है– (1) इन्द्रिय (2) इन्द्रियार्थसन्निकर्ष (3) ज्ञान।
Note- न्यायवैशेषिक चार प्रमाण तथा वैशेषिक दो प्रमाण मानता है।